September 19,2026 Fact Recorder
Education Desk: उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के तहत MBBS एडमिशन में कथित फर्जी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। जांच के दौरान चार छात्राओं से जुड़े दस्तावेजों में कथित अनियमितताएं मिलने के बाद पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें एक छात्रा ने NEET UG में 234 अंक हासिल किए थे और उसे सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट आवंटित हुई थी।
234 अंक वाली छात्रा को श्रीनगर मेडिकल कॉलेज मिला
देहरादून में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के तहत हुए एडमिशन की जांच में कई जानकारियां सामने आई हैं।
पुलिस के अनुसार, स्वाति नाम की छात्रा ने NEET UG में 234 अंक हासिल किए और उसे श्रीनगर मेडिकल कॉलेज की सीट मिली। वहीं परी को 338 अंकों पर हल्द्वानी, खुशी को 301 अंकों पर श्रीनगर और तृप्ति को 400 अंकों पर हरिद्वार का मेडिकल कॉलेज आवंटित किया गया था।
इन अभ्यर्थियों की NEET रैंक करीब 27 हजार से 88 हजार के बीच बताई गई है।
चार छात्राओं समेत पांच लोगों पर FIR
मामले में चार छात्राओं समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ दो अलग-अलग थानों में मुकदमा दर्ज किया गया है। जिलाधिकारी कार्यालय के निर्देश पर हुई जांच के दौरान संबंधित आवेदनों में लगाए गए दस्तावेजों में कथित गड़बड़ियां सामने आई थीं।
इसके बाद संबंधित प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, रायपुर थाने में कंडोली के पटवारी जगदीश कुमार और क्लेमनटाउन थाने में पटवारी डिंपल की शिकायत पर मामले दर्ज किए गए हैं।
पुलिस ने BNS की धारा 318(4), 338 और 340 के तहत जांच शुरू की है।
प्रमाण पत्रों में दिए पते भी जांच के दायरे में
जांच में यह भी सामने आया कि जिन पतों के आधार पर कथित तौर पर प्रमाण पत्र तैयार किए गए, वहां संबंधित अभ्यर्थियों के निवास से जुड़े पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले।
अब पुलिस आवेदन के साथ लगाए गए आधार कार्ड, फोटो, मोबाइल नंबर और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि प्रमाण पत्र तैयार कराने और आवेदन प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी।
संगठित नेटवर्क की भी जांच
पुलिस को आशंका है कि मामला केवल कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं हो सकता। कथित फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने के पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि दस्तावेज कहां तैयार हुए, उन्हें सत्यापित कैसे किया गया और संबंधित प्रमाण पत्र जारी करने से पहले दस्तावेजों और पते का सत्यापन किस स्तर पर किया गया था।
SIT कर सकती है दोनों मामलों की जांच
पुलिस अधीक्षक-नगर प्रमोद कुमार के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने की तैयारी है। SIT बनने के बाद रायपुर और क्लेमनटाउन थानों में दर्ज दोनों मामलों की संयुक्त जांच की जा सकती है।
मामले में अब राजस्व विभाग की प्रमाण पत्र सत्यापन प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाएगी कि प्रमाण पत्र जारी करने से पहले संबंधित पते और दस्तावेजों का आवश्यक सत्यापन किया गया था या नहीं।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।













