4 August 2026 Fact Recorder
International Desk: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए नए आयात शुल्क (टैरिफ) को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका के 25 राज्यों ने भारत समेत करीब 60 देशों से आयात होने वाले सामान पर लगाए गए 10% से 12.5% तक के टैरिफ को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया है। राज्यों ने इन शुल्कों को अवैध बताते हुए इन्हें तत्काल प्रभाव से रोकने और अब तक वसूली गई राशि वापस करने की मांग की है।
मुकदमे में कहा गया है कि पिछले महीने ट्रंप प्रशासन ने भारत, 59 अन्य देशों और यूरोपीय संघ से आने वाले कई उत्पादों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया था। प्रशासन का दावा है कि संबंधित देश जबरन श्रम से बने उत्पादों पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहे हैं, इसलिए यह कदम उठाया गया।
क्या है कानूनी विवाद?
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स सहित 25 राज्यों का कहना है कि नए टैरिफ से अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उनका तर्क है कि राष्ट्रपति के पास इस तरह एकतरफा आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।
राज्यों ने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष ट्रेड डेफिसिट को राष्ट्रीय आपातकाल बताते हुए लगाए गए टैरिफ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर सवाल उठाए थे। अदालत के फैसले के बाद सरकार को आयातकों से वसूली गई राशि लौटानी पड़ी थी।
ट्रंप प्रशासन का नया कदम
पुराने फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने इस बार ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 (Section 301) के तहत नए टैरिफ लागू किए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह प्रावधान अनुचित व्यापारिक गतिविधियों और जबरन श्रम से जुड़े मामलों में कार्रवाई की अनुमति देता है।
व्हाइट हाउस ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि यह कदम पूरी तरह कानूनी है और इसका उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों, उद्योगों और व्यापारिक हितों की रक्षा करना है।
यदि अदालत इन टैरिफ पर रोक लगाती है, तो इसका असर भारत समेत उन सभी देशों के साथ अमेरिका के व्यापार पर पड़ सकता है, जो इस नए आयात शुल्क के दायरे में आए हैं।













