27 अप्रैल 2026 Fact Recorder
National Desk: केंद्र सरकार अब देश में नक्सलवाद पर काफी हद तक काबू पाने के बाद पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद खत्म करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। सरकार ने 2029 तक पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र से उग्रवाद और नशीली दवाओं की तस्करी को समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है, जिसमें मणिपुर को सबसे अहम प्राथमिकता दी गई है।
सुरक्षा रणनीति के तहत गुरिल्ला युद्ध में प्रशिक्षित CRPF की विशेष यूनिट CoBRA (कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन) को अब पूर्वोत्तर में तैनात किया जाएगा। ये यूनिट पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रभावी कार्रवाई के लिए जानी जाती रही है। हालांकि, नक्सल प्रभावित इलाकों से सुरक्षा बलों की वापसी पूरी तरह नहीं होगी, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
मणिपुर में उग्रवाद से निपटने के लिए खास सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। यहां माइन-प्रोटेक्टेड और बुलेटप्रूफ वाहनों की तैनाती शुरू हो चुकी है, जो संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में उग्रवाद से जुड़ी घटनाओं में भारी कमी आई है। 2014 में जहां 824 घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2024 तक यह संख्या घटकर 294 रह गई। हालांकि, हाल के वर्षों में हुई अधिकांश घटनाएं मणिपुर में जातीय संघर्ष से जुड़ी रही हैं, जो पूरे पूर्वोत्तर के उग्रवाद मामलों का लगभग 77% हिस्सा हैं।
पूर्वोत्तर में फिलहाल 16 सक्रिय उग्रवादी समूह हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 8 समूह मणिपुर में सक्रिय हैं। इसके अलावा असम में 3, मेघालय और त्रिपुरा में 2-2, जबकि नागालैंड में 1 समूह सक्रिय है।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, पूर्वोत्तर में उग्रवाद के साथ-साथ नशीली दवाओं की तस्करी पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। मणिपुर के उखरुल जैसे संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल और आधुनिक उपकरण भेजे जा चुके हैं, जहां नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव की घटनाएं सामने आई हैं।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की रणनीति साफ है—नक्सलवाद के बाद अब पूर्वोत्तर में शांति बहाल करना और 2029 तक उग्रवाद को पूरी तरह समाप्त करना।













