Home Hindi तमिलनाडु में “थलापति” की एंट्री: विजय ने बदली सियासत की दिशा

तमिलनाडु में “थलापति” की एंट्री: विजय ने बदली सियासत की दिशा

05 May 2026 Fact Recorder

National Desk:  तमिलनाडु की राजनीति में 2026 का चुनाव एक बड़े बदलाव का संकेत बनकर उभरा है। अभिनेता से नेता बने विजय (जोसफ विजय चंद्रशेखर) ने अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कषगम के जरिए ऐतिहासिक जीत दर्ज कर करीब 60 साल से चले आ रहे द्रविड़ दलों के वर्चस्व को चुनौती दे दी है।


द्रविड़ राजनीति को बड़ा झटका

राज्य में लंबे समय से सत्ता पर काबिज DMK और AIADMK जैसी पार्टियों को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है। विजय की जीत ने यह साफ कर दिया कि तमिलनाडु की जनता अब पारंपरिक राजनीति से अलग विकल्प तलाश रही है।


फिल्मी लोकप्रियता से राजनीतिक ताकत तक

दक्षिण भारत में सिनेमा और राजनीति का गहरा संबंध रहा है। एम. जी. रामचंद्रन, जे. जयललिता और एम. करुणानिधि जैसे नेताओं ने इसी परंपरा को मजबूत किया था।
हालांकि रजनीकांत और कमल हासन राजनीति में अपेक्षित सफलता नहीं पा सके, लेकिन विजय ने इस मिथक को तोड़ दिया।


2024 में पार्टी, 2026 में सत्ता

विजय ने 2 फरवरी 2024 को तमिलगा वेट्री कषगम की स्थापना की और बहुत कम समय में मजबूत जनाधार तैयार कर लिया। उन्होंने अपनी रैलियों में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलताओं और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जिससे युवा, महिलाएं और नए मतदाता बड़ी संख्या में उनके साथ जुड़े।


स्टालिन सरकार पर सीधा हमला

विजय ने अपने अभियान के दौरान एम. के. स्टालिन और उनकी सरकार को मुख्य निशाने पर रखा। उन्होंने कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और प्रशासनिक नीतियों को लेकर लगातार सवाल उठाए।


ऐतिहासिक संदर्भ और तुलना

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की जीत आंध्र प्रदेश में एन. टी. रामाराव के उदय जैसी है, जिन्होंने 1980 के दशक में क्षेत्रीय अस्मिता के दम पर सत्ता परिवर्तन किया था।


सामाजिक समीकरणों से परे जनसमर्थन

तमिलनाडु में धार्मिक या जातीय राजनीति का प्रभाव सीमित रहा है। यही वजह है कि अलग पृष्ठभूमि से आने के बावजूद विजय को व्यापक समर्थन मिला। उनकी जीत में खासतौर पर युवाओं, महिलाओं और बदलाव चाहने वाले मतदाताओं की बड़ी भूमिका रही।


क्या बदल जाएगी तमिलनाडु की राजनीति?

विजय की इस जीत ने राज्य की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब सवाल यह है कि क्या तमिलगा वेट्री कषगम लंबे समय तक इस समर्थन को बनाए रख पाएगी और क्या तमिलनाडु में पारंपरिक द्रविड़ राजनीति का युग सच में समाप्ति की ओर है।

फिलहाल इतना तय है कि 2026 का यह जनादेश राज्य की सियासत में एक नए अध्याय की शुरुआत कर चुका है।