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मिडिल ईस्ट तनाव के बीच चमक सकते हैं Tata Steel और Vedanta के शेयर, ग्लोबल रिपोर्ट में बड़ा संकेत

09 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Business Desk:  मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक कमोडिटी बाजार पर भी दिखने लगा है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संकट से एल्युमिनियम और स्टील की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, जिससे इन धातुओं की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। ऐसे माहौल में भारतीय मेटल कंपनियों—खासतौर पर Vedanta और Tata Steel—के लिए बड़ा अवसर बनता नजर आ रहा है।

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म CLSA की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट क्षेत्र दुनिया की कुल प्राइमरी एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता का लगभग 9% हिस्सा संभालता है, जो करीब 6.9 मिलियन टन है। युद्ध के कारण इस क्षेत्र की सप्लाई चेन प्रभावित होने से वैश्विक बाजार में एल्युमिनियम की उपलब्धता कम हो सकती है और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

वेदांता को सबसे ज्यादा फायदा

रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे हालात में उन कंपनियों को सबसे अधिक फायदा मिलता है जो कच्चे माल के मामले में आत्मनिर्भर होती हैं। इस मामले में Vedanta को मजबूत स्थिति में माना गया है। कंपनी का कारोबार एल्युमिनियम, जिंक और तेल जैसे कई क्षेत्रों में फैला हुआ है।

इसी वजह से ब्रोकरेज फर्म CLSA ने वेदांता के शेयर का अनुमानित लक्ष्य मूल्य 835 रुपये से बढ़ाकर 1,030 रुपये कर दिया है।

हिंडाल्को को सीमित फायदा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Hindalco Industries को इस तेजी का सीमित फायदा मिल सकता है। इसकी वजह यह है कि कंपनी ने अपनी भविष्य की बिक्री का एक बड़ा हिस्सा पहले ही कम कीमतों पर तय कर लिया है। साथ ही यूरोप में गैस की बढ़ती कीमतें इसकी विदेशी इकाइयों के लिए चुनौती बन सकती हैं।

स्टील सेक्टर में टाटा स्टील मजबूत

स्टील सेक्टर में Tata Steel को सबसे सुरक्षित दांव माना जा रहा है। कंपनी के पास लौह अयस्क की अपनी खदानें हैं, जिससे कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का असर अपेक्षाकृत कम पड़ता है।

दूसरी ओर JSW Steel और Jindal Steel and Power जैसी कंपनियों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि वे आयातित कोयले पर ज्यादा निर्भर हैं और कर्ज का स्तर भी अपेक्षाकृत अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई संकट, यूरोप के कार्बन टैक्स नियम और चीन में उत्पादन नियंत्रण जैसे कारकों के कारण स्टील की कीमतें नीचे आने की संभावना सीमित है। ऐसे में आने वाले समय में भारतीय मेटल कंपनियों के लिए यह स्थिति बड़ा आर्थिक अवसर साबित हो सकती है।