4 फरवरी 2026 Fact Recorder
National Desk: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले में सबसे बड़ी और खास बात यह है कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं अदालत में जिरह करती नजर आ सकती हैं। यदि उन्हें अनुमति मिलती है, तो वे सुप्रीम कोर्ट में खुद केस लड़ने वाली पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बन जाएंगी।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी कानूनी टीम के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक अंतरिम आवेदन दाखिल किया है, जिसमें उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश से स्वयं दलीलें पेश करने की अनुमति मांगी है। ममता बनर्जी पेशे से प्रशिक्षित अधिवक्ता हैं और इस संवेदनशील मुद्दे पर सीधे अदालत के सामने अपना पक्ष रखने की तैयारी में हैं।
ECI के SIR आदेशों को रद्द करने की मांग
अपनी याचिका में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा 24 जून 2025 और 27 अक्तूबर 2025 को जारी किए गए SIR से जुड़े सभी आदेशों और निर्देशों को रद्द करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से यह निर्देश देने की अपील की है कि आगामी विधानसभा चुनाव 2025 की अपरिवर्तित मतदाता सूची के आधार पर ही कराए जाएं।
मुख्यमंत्री का तर्क है कि SIR प्रक्रिया में 2002 की आधारभूत सूची पर निर्भरता और जटिल सत्यापन प्रणाली के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
टीएमसी सांसदों की याचिकाओं पर भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ आज इस मामले से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इनमें मोस्तरी बानू और तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन व डोला सेन द्वारा दायर याचिकाएं भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अलग से दाखिल याचिका पर भी विचार किया जाएगा।
आज की सुनवाई न केवल बंगाल की राजनीति बल्कि आगामी चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसका सीधा असर राज्य की मतदाता सूची और चुनावी व्यवस्था पर पड़ सकता है।













