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सिरसा के गांवों में पानी संकट पर सरकार मौन: विधानसभा में विधायक सेतिया बोले-7 साल पहले की घोषणा का क्या हुआ; नहीं मिला जवाबl

27/March/2025 Fact Recorder 

सिरसा जिले के 20 गांवों की नहर का मुद्दा हरियाणा विधानसभा में भी उठा है। हैरानी की बात है कि इस पर कोई जवाब नहीं मिला। ऐसे में नहर के बनने की उम्मीद भी कम हो गई है। इससे ग्रामीणों को गहरा झटका लगने वाला है।

यह मुद्दा सिरसा के विधायक गोकुल सेतिया ने बुधवार को हरियाणा विधानसभा सत्र में उठाया। सेतिया ने कहा कि धिकतानियां चैनल 7 साल से नहीं बन पाई है। मात्र लगभग 2 लाख रुपए इस माइनर के निर्माण पर खर्च किए गए हैं।

यह माइनर गांव मंगाला से जमाल जा रही है, लेकिन इसके आसपास के 20 गांवों को वंचित रखा है। यहां सिंचाई पानी की कोई सुविधा नहीं है। इन गांवों का जमीनी पानी या ट्यूबवैल का पानी भी 500 फीट नीचे जा चुका है। जमीनी पानी में भी नमक की मात्रा ज्यादा है। इसलिए यह सिंचाई तो दूर पानी पीने योग्य भी नहीं है।

7 साल पहले खट्टर ने की थी नहर बनाने की घोषणा

सेतिया ने कहा 7 साल पहले पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर ने इन गांवों के लिए नहर बनाने की घोषणा की थी। मगर सरकार ने न कोई जमीन खरीदी और न ही माइनर को बनाने की दिशा में कदम उठाया।

उस समय जमीनों के रेट 12 से 15 लाख रुपए प्रति एकड़ थी, लेकिन आज 40 से 50 लाख रुपए हो गई है। ग्रामीण भी अपनी जमीन 40 लाख रुपए में देने को तैयार है। इस समय इन 20 गांवों के ग्रामीण सिंचाई पानी न मिलने से परेशान हैं और पीने के लिए पानी भी पर्याप्त नहीं है। इस समय माइनर की क्या स्थिति है। उस समय विधानसभा स्पीकर या सरकार के किसी प्रतिनिधि ने कोई जवाब नहीं दिया।

ट्यूबवैल का पानी पीने या सिंचाई के योग्य नहीं

जानकारी के अनुसार ओटू के पास झील बनी है। ग्रामीणों ने बरसाती पानी देने की मांग उठाई थी, ताकि सिंचाई पानी मिल सकें। ट्यूबवैल का पानी पीने या सिंचाई के योग्य नहीं है। जमीनी पानी का स्तर गिरता जा रहा है।

गांव शहीदांवाली, नटार, सलारपुर, बेगू, रंगड़ी खेड़ा, चौबुरजा सहित एक दर्जन से ज्यादा गांव पीने की पानी से समस्या से परेशान है। इन गांवों में सिंचाई पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। लोग पीने के लिए नहरों से पानी के टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं।

इसको लेकर इन गांवों के ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन भी चला था। संघर्ष समिति बनी और कमेटी बनी। सरकार के समक्ष काफी मुद्दा उठाया। मगर कुछ नहीं हुआ। सरकार नहर के लिए फ्री में जमीन चाहती थी, पर ग्रामीण मार्केट रेट में जमीन देने को तैयार थे। सरकार ने जमीन की कोई पेमेंट नहीं की और यह प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ा।