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विधायक आदित्य देवीलाल और विधायक अर्जुन चौटाला।
इनेलो विधायक आदित्य देवीलाल ने वीरवार को विधानसभा बजट सत्र के दौरान शैक्षणिक संस्थानों को अलॉट की गई भूमि का मुद्दा उठाया। आदित्य मास्टर प्लान शैक्षणिक संस्थानों दी जाने भूमि को बाद में वाणिज्यिक और कॉमर्शियल गतिविधियों के लिए अलॉट करने पर दिए गए ध्य
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आदित्य देवीलाल ने कहा कि मास्टर प्लान में जो जमीन शिक्षण संस्थानों के लिए आवंटित की गई है, उन्हें बाद में बड़े संस्थानों और बिल्डर्स को क्यों बेचा जा रहा है। ऐसी क्या जरूरत पड़ गई। इसका एक उदाहरण देते हुए कहा कि गुरुग्राम में सेक्टर 43 में जो मास्टर प्लान में एक शिक्षण संस्थान के लिए जमीन अलॉट की गई थी।
उसको सीएलयम करके डीएलएफ को बेच दिया और डीएलएफ ने उसमें 190 करोड़ का फ्लैट बेच दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय में भी किसानों से कौड़ियों के भाव जमीन लेकर रिलायंस को सारी जमीनें बेच दी गई। अब सरकार बड़े-बड़े बिल्डरों को जमीन दे रही है। अब यहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बेटा गुरुग्राम में जमीन खरीद रहा है।
जोहड़ों की खुदाई में हो रहे भ्रष्टाचार प्रश्नकाल के दौरान अमृत सरोवर योजना के तहत खोदे गए गांवों के जोहड़ की रिपोर्ट में गांव की पंचायत या प्रमुख लोगों का भी जिक्र किया जाए। पानी के संरक्षण के लिए अमृत सरोवर योजना लागू की गई थी, लेकिन इसमें बहुत बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है।
जिन जोहड़ों की मिट्टी खोदकर बाहर डालनी थी, उस मिट्टी को जोहड़ के अंदर ही बरम पर लगा दी गई, जिसके कारण जोहड़ का एरिया छोटा हो गया है। जबकि मिट्टी निकालने का उद्देश्य जोहड़ को चौड़ा करना और पानी को रिचार्ज करना है। ताकि ज्यादा से ज्यादा पानी साफ करके संरक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि वे जोहड़ों की खुदाई संतुष्ट नहीं है।
नशे की रोकथाम पर अर्जुन चौटाला ने पूछे सवाल बजट सत्र के 11वें दिन प्रश्नकाल के दौरान विधायक अर्जुन चौटाला ने नशे की रोकथाम पर प्रश्न पूछते हुए कहा कि जिलेवार चलाए जाने वाले नशा मुक्ति केंद्र कौन से प्रोटोकॉल फॉलो करते हैं। एनएबीएच और आइआरसीए में से किसकी गाइडलाइन के ऊपर सरकार अनुसरण करती है। दूसरा सरकार किस आधार पर नशे के आदी युवा को नशा मुक्त मानती है।
नशा मुक्ति केंद्र से डिस्चार्ज होने के बाद क्या उस युवक को फॉलो अप किया जाता है। क्योंकि बहुत सारे ऐसे केस मिले हैं, जिनमें नशा मुक्ति केंद्र से बाहर आने के बाद फॉलोअप न लेने के कारण फिर से नशा करने लगता है।
किसी गांव को नशा मुक्त घोषित करने का मानदंड क्या है, क्योंकि यह सामने आया है कि सरकार द्वारा प्रदेश के कई गांवों को नशा मुक्त घोषित करने के बाद भी उसी गांव में दो दिन बाद ही ओवरडोज के कारण युवा की मौत हो गई। क्या सरकार के दबाव में गांव को नशा मुक्त घोषित किया जाता है?
अर्जुन चौटाला ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार कई जिले ऐसे हैं, जहां नशे के 30-40 केस है। कई जिले ऐसे हैं, जैसे सिरसा जिला जहां 4500 से ज्यादा नशे के केस है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया कि वो स्वयं नशा मुक्ति केंद्रों में जाए, ताकि इन केंद्रों का और ज्यादा सुधार किया जा सके।











