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डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, 96.23 तक पहुंची भारतीय करेंसी

18 May 2026 Fact Recorder

Business Desk:  भारतीय रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 96.23 पर पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.97 पर बंद हुआ था। कमजोर रुपये और महंगे कच्चे तेल ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव

रुपये में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। तनाव बढ़ने के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने भी बाजार में डर का माहौल पैदा किया है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश का आयात बिल तेजी से बढ़ने लगता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई चिंता

रुपये पर दबाव बढ़ाने में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की तेजी भी बड़ी वजह बन रही है। अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.625 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे निवेशकों का रुझान अमेरिकी बॉन्ड्स की ओर बढ़ रहा है और उभरते बाजारों से विदेशी निवेश निकल रहा है।

इसका असर भारतीय मुद्रा समेत एशियाई करेंसी पर भी देखने को मिल रहा है।

RBI की नजर बाजार पर

स्थिति को देखते हुए Reserve Bank of India लगातार बाजार पर नजर बनाए हुए है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि RBI ने हाल के दिनों में रुपये को ज्यादा कमजोर होने से रोकने के लिए अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप भी किया है।

हालांकि जानकारों का कहना है कि केंद्रीय बैंक किसी तय स्तर को बचाने के बजाय सिर्फ अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने की कोशिश करेगा।

आम आदमी पर पड़ेगा असर

कमजोर रुपया और महंगा कच्चा तेल आम लोगों की जेब पर असर डाल सकता है। आयात महंगा होने से पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो महंगाई बढ़ने के साथ-साथ देश के चालू खाते के घाटे और राजकोषीय दबाव में भी इजाफा हो सकता है।