09 अक्टूबर 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: टाटा ट्रस्ट्स में गवर्नेंस विवाद, टाटा संस लिस्टिंग और बोर्ड बैठक पर नियामक और निवेशकों की नजर
टाटा ट्रस्ट्स के भीतर गवर्नेंस, पारदर्शिता और टाटा संस की बाजार में लिस्टिंग को लेकर मतभेद सामने आए हैं। आरबीआई के नियमों के अनुसार, टाटा संस को सितंबर 2025 तक लिस्ट होना था, लेकिन अब तक कोई लिस्टिंग प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। माना जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस को लिस्टिंग से छूट दे दी है।
कई दशक पुराने टाटा समूह में उपजे विवाद पर नियामकों और निवेशकों की निगाहें टिकी हुई हैं। विवाद सुलझाने के लिए 10 सितंबर को बोर्ड की बैठक बुलायी गई है। इससे पहले मंगलवार को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की।
💼 टाटा समूह का नियंत्रण और कारोबार
टाटा समूह का नियंत्रण टाटा ट्रस्ट्स के पास है, जिसके पास टाटा संस में बहुमत की हिस्सेदारी है। टाटा संस 180 अरब डॉलर के कारोबारी साम्राज्य वाले टाटा समूह को नियंत्रित करती है, जिसमें टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज समेत कई कंपनियां शामिल हैं।
⚖️ दो गुटों में बंटा बोर्ड
टाटा ट्रस्ट्स का बोर्ड अब दो खेमों में बंट गया है:
पहला गुट: नोएल टाटा, वेणू श्रीनिवासन और विजय सिंह
दूसरा गुट: मेहली मिस्त्री, डेरियस खंबाटा, जहांगीर और प्रमीत झावेरी
मेहली मिस्त्री को रतन टाटा का करीबी माना जाता था और वे उनकी वसीयत के एग्जिक्यूटर्स भी हैं।
📝 विवाद के कारण
नोएल टाटा को रतन टाटा का उत्तराधिकारी माना गया था, लेकिन कुछ ट्रस्टी उनकी निर्णय प्रक्रिया पर निगरानी रख रहे हैं। समूह के नियमों के अनुसार, टाटा संस से जुड़े बड़े फैसलों के लिए ट्रस्ट्स की मंजूरी जरूरी है। इसमें 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश, चेयरमैन की नियुक्ति या हटाने जैसे फैसले शामिल हैं।
⚡ मिस्त्री परिवार को बाहर का रास्ता
टाटा समूह शापूरजी पलोनजी समूह को बाहर करने की तैयारी में है। शापूरजी का टाटा समूह में 18.3% हिस्सा है, जो 1936 से चला आ रहा है। 2016 में साइरस मिस्त्री और रतन टाटा के बीच विवाद के बाद संबंध खटासपूर्ण हो गए थे। अब 10 साल बाद यह विवाद नोएल टाटा और मेहली मिस्त्री के बीच एक बार फिर उभरकर सामने आया है।
नोट: यह बोर्ड बैठक और निवेशकों की निगरानी टाटा समूह के भविष्य और टाटा संस की लिस्टिंग पर बड़ा असर डाल सकती है।













