03 दिसंबर, 2025 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो गई है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बने रहने के संकेत दे रही है और महंगाई तेजी से नीचे आई है।
नीतिगत फैसलों की घोषणा आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 दिसंबर सुबह 10 बजे करेंगे।
एमपीसी के सदस्य वर्तमान आर्थिक आंकड़ों—खासकर GDP ग्रोथ और महंगाई दर—का विश्लेषण कर भविष्य की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों की दिशा पर चर्चा करेंगे।
मजबूत आर्थिक संकेतक
चालू वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर) में देश की GDP वृद्धि 8.2% दर्ज की गई है। वहीं खुदरा महंगाई (CPI) अक्टूबर 2025 में गिरकर 0.25% के ऐतिहासिक निम्न स्तर पर आ सकती है, जैसा कि MoSPI के प्रारंभिक अनुमान दर्शाते हैं।
रेपो रेट फिलहाल स्थिर रहने की संभावना
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, उम्मीद है कि आरबीआई इस बैठक में रेपो रेट को 5.50% पर यथावत रख सकता है और नीति रुख तटस्थ (Neutral) बनाए रख सकता है। रिपोर्ट कहती है कि महंगाई अपने अनुमान से भी नीचे जा सकती है, इसलिए भले ही ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश मौजूद हो, लेकिन आरबीआई इस नीति में सतर्क रुख अपना सकता है।
विशेषज्ञों की राय
केयरएज रेटिंग्स के एमडी और ग्रुप सीईओ मेहुल पंड्या के अनुसार,
“मजबूत GDP वृद्धि और कम महंगाई—ब्याज दरों के लिए परस्पर विपरीत संकेत हैं।”
उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक आमतौर पर तेज आर्थिक विकास के दौरान ब्याज दरों में कटौती नहीं करते, जबकि कम महंगाई की स्थिति कटौती के पक्ष में रहती है। इसलिए नीति में संतुलन और सावधानी की संभावना अधिक है।













