18 June 2026 Fact Recorder
National Desk: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित हेराफेरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मामले के प्रमुख किरदार माने जा रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के अचानक सामने आकर बयान देने से कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले करीब दस दिनों से खामोश रहे टिन्नू ने वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा और कई मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू भी दिए।
सूत्रों के अनुसार, टिन्नू का अचानक सक्रिय होना कोई सामान्य घटनाक्रम नहीं माना जा रहा। चर्चा है कि एक सुनियोजित रणनीति के तहत उसे आगे लाया गया है ताकि कुछ प्रभावशाली लोगों का बचाव किया जा सके। अपने बयानों में टिन्नू ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पक्ष लिया, जबकि ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर सवाल खड़े किए।
6 जून को सामने आए इस कथित घोटाले के बाद से ट्रस्ट के अधिकांश पदाधिकारी सार्वजनिक रूप से चुप्पी साधे हुए हैं। यहां तक कि सामान्यतः कारसेवकपुरम में रहने वाले महासचिव चंपत राय भी मंदिर परिसर स्थित ट्रस्ट कार्यालय तक सीमित रहे हैं। इस बीच टिन्नू का अचानक मीडिया के सामने आना कई तरह की अटकलों को जन्म दे रहा है।
सूत्रों का दावा है कि एक राजनीतिक दल के कुछ नेताओं ने भी टिन्नू से संपर्क किया था और उसे सलाह दी थी कि वह सामने आकर अपना पक्ष रखे, क्योंकि जांच की दिशा उसे मुख्य आरोपी के रूप में पेश कर सकती है। माना जा रहा है कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों की सहमति से भी यह कदम उठाया गया।
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा, टिन्नू यादव और मंदिर निर्माण सहायक गोपाल राव सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में हैं। दान राशि के प्रबंधन और गणना प्रक्रिया में इनकी भूमिका को लेकर एसआईटी विशेष रूप से पड़ताल कर रही है।
उधर, अनिल मिश्रा के अयोध्या से बाहर होने की चर्चा भी तेज है। बताया जा रहा है कि वे केरल में हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
इसी बीच एसआईटी की जांच में सीसीटीवी फुटेज से कथित छेड़छाड़ के संकेत मिलने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी को आशंका है कि दान राशि में गड़बड़ी के सबूत मिटाने के लिए फुटेज में बदलाव किया गया। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है।
एसआईटी ने टिन्नू यादव से लंबी पूछताछ की है। पूछताछ के दौरान उसने खुद को दान राशि की गणना प्रक्रिया से अलग बताते हुए किसी भी प्रकार की चोरी या गबन में शामिल होने से इनकार किया। हालांकि उसने ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और तीन गणना प्रभारी कर्मचारियों की जिम्मेदारी का जिक्र किया है।
जांच में बैंक की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। सूत्रों का कहना है कि दान राशि की गणना बैंक कर्मियों की मौजूदगी में होती थी, लेकिन कई बार वे ट्रस्ट पदाधिकारियों के दबाव के कारण हस्तक्षेप नहीं कर पाते थे।
एसआईटी अब तक करीब 125 लोगों से पूछताछ कर चुकी है और लगभग 200 लोगों की सूची तैयार की गई है। कुछ लोगों से कई बार पूछताछ भी की गई है। वहीं, पांच संदिग्धों से बरामद धनराशि और उनके बयानों के आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
इस बीच 19 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच और उससे जुड़े घटनाक्रमों पर उनकी नजर बनी हुई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एसआईटी जांच के दौरान एफआईआर कब दर्ज होगी, और क्या जांच की आंच केवल कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या फिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों तक भी पहुंचेगी।











