19 June 2026 Fact Recorder
National Desk: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों से नकदी गायब होने के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। हालांकि अब तक गायब धनराशि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कथित हेराफेरी की रकम करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है। मामले की जांच कर रही एसआईटी हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
जांच में यह संकेत मिले हैं कि दानराशि में कथित गड़बड़ी का सिलसिला रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले ही शुरू हो गया था। 22 जनवरी 2024 के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं और चढ़ावे की संख्या बढ़ने के साथ कथित अनियमितताओं का दायरा भी बढ़ता गया। शुरुआती दौर में प्रतिदिन दो से चार लाख रुपये तक की नकदी निकालने की बात सामने आई है, जबकि बाद में यह राशि कई गुना बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
जांच के केंद्र में अनुकल्प मिश्रा
एसआईटी की जांच में मिल्कीपुर निवासी अनुकल्प मिश्रा का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक ट्रस्टी की सिफारिश पर उसे मंदिर से जुड़े कार्यों में नियुक्त किया गया था और बाद में दानराशि की गणना का जिम्मा भी सौंपा गया। जांच एजेंसियों को संदेह है कि उसने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को इस व्यवस्था से जोड़कर एक नेटवर्क तैयार किया, जिसके माध्यम से कथित तौर पर दानराशि में हेराफेरी की गई।
सूत्रों के अनुसार करीब आठ महीने पहले उसके बहनोई लवकुश मिश्रा को भी गणना कार्य से जोड़ा गया था। आरोप है कि उसने अपनी शिफ्ट में काम करने वाले कई कर्मचारियों पर प्रभाव स्थापित कर लिया था।
नकदी बाहर पहुंचाने का तरीका भी जांच में आया सामने
जांच के दौरान यह जानकारी मिली है कि दानपात्रों से निकाली गई नकदी को पहले यात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी) के बाथरूम में छिपाया जाता था। बाद में मौका मिलने पर उसे सुरक्षा जांच से बचाते हुए परिसर से बाहर निकाला जाता था। जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि रकम को कथित तौर पर कौशलपुरी स्थित एक स्थान तक पहुंचाया जाता था, जहां उसके बंटवारे की संभावना जताई जा रही है।
एसआईटी अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि यह गतिविधि इतने लंबे समय तक बिना किसी संदेह के कैसे चलती रही।
नियुक्तियों और ड्यूटी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
जांच का एक अहम हिस्सा उन नियुक्तियों और ड्यूटी व्यवस्थाओं की पड़ताल है, जिनके जरिए गणना कार्य संचालित होता था। पूछताछ के दौरान रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव ने बताया कि अनुकल्प मिश्रा और उसके कुछ परिचितों की नियुक्ति ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र की सिफारिश पर हुई थी।
सूत्रों का कहना है कि गणना कार्य से जुड़े कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों के पास थी। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एजेंसियां सभी तथ्यों का सत्यापन कर रही हैं।
कई लोग जांच के दायरे में
पिछले तीन दिनों के दौरान एसआईटी ने कई कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ की है। जांच के दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि दानराशि की गणना करने वाले कर्मचारियों की बाहर निकलते समय नियमित जांच क्यों नहीं की जाती थी।
मामले में दानराशि को बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी संभालने वाले सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव भी जांच के घेरे में आए हैं। इसके अलावा रामशंकर यादव, मनीष यादव और राजेश पाठक से भी पूछताछ की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल अब भी बरकरार
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि आखिर दानपात्रों से कुल कितनी राशि गायब हुई। एसआईटी फिलहाल सीसीटीवी फुटेज, बैंक जमा रिकॉर्ड, दान गणना से जुड़े दस्तावेज और कर्मचारियों के बयानों का मिलान कर रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही वास्तविक नुकसान का सही आंकड़ा सामने आ सकेगा।
देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल राम मंदिर में दानराशि से जुड़ी इस कथित अनियमितता ने श्रद्धालुओं के साथ-साथ मंदिर प्रबंधन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें एसआईटी जांच पर टिकी हैं, जिससे इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।













