15 July 2026 Fact Recorder
Himachal Desk: हिमाचल प्रदेश सरकार ने मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत इस वर्ष सी-ग्रेड सेब खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने का फैसला किया है। प्रस्तावित नए नियमों के अनुसार, एक बागवान से अधिकतम 30 बोरी सी-ग्रेड सेब ही खरीदा जाएगा। इन नए दिशा-निर्देशों को 20 जुलाई को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी मिल सकती है।
नई व्यवस्था के तहत सेब खरीद की पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों और कृषि एवं बागवानी विभाग के अधिकारियों की निगरानी में होगी। इसके लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया गया है, जिससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सेब बेचने से पहले बागवानों को अपनी भूमि संबंधी दस्तावेज जमा कराने होंगे। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही खरीद पर्ची जारी की जाएगी, ताकि केवल पात्र बागवान ही योजना का लाभ उठा सकें।
इस बार खरीद केंद्रों पर तौल, लोडिंग और उठान का कार्य आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कराया जाएगा। वहीं, सेब का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे बागवानों के बैंक खातों में भेजा जाएगा। सरकार ने यह भी तय किया है कि डिफॉल्टर आढ़तियों और कारोबारियों को सेब खरीद का लाइसेंस नहीं दिया जाएगा।
खरीद केंद्रों की संख्या भी कम की जाएगी। अब 10 से 20 किलोमीटर के दायरे में एक खरीद केंद्र स्थापित होगा और फल मंडियों से 20 किलोमीटर के भीतर नया केंद्र नहीं खोला जाएगा। इस वर्ष उत्पादन वाले क्षेत्रों के आधार पर करीब 40 खरीद केंद्र स्थापित किए जाने की योजना है।
प्रदेश में एमआईएस के तहत हर साल लगभग 60 करोड़ रुपये मूल्य के सी-ग्रेड सेब की खरीद की जाती है। इस बार खरीदे गए सेब की बिक्री भी ऑनलाइन नीलामी के माध्यम से की जाएगी, जिससे सरकार को बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने यह बदलाव पिछले वर्ष रोहड़ू क्षेत्र में सामने आई अनियमितताओं के बाद किया है, जहां कुछ बागवानों से हजारों बोरियां सी-ग्रेड सेब खरीदने के मामले जांच के दायरे में आए थे। सरकार का कहना है कि नए नियमों से पूरी खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।













