September 04,2026 Fact Recorder
Chandigarh Desk: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की मोहाली में पंजीकृत वोट को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची में ‘परमानेंटली शिफ्टेड’ दर्ज किए जाने को लेकर पंजाब की सियासत गरमा गई है। इस मामले में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बूथ लेवल एजेंट (BLA) की सहमति दर्ज होने की बात सामने आई है।
जानकारी के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जब बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मतदाता के पते का सत्यापन करते हैं और संबंधित व्यक्ति द्वारा एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं किया जाता, तो उपलब्ध रिकॉर्ड और सत्यापन के आधार पर उसकी स्थिति दर्ज की जाती है। राघव चड्ढा के मामले में भी वोट को ‘शिफ्टेड’ के तौर पर दर्ज किया गया है।
बीएलए की सहमति बनी विवाद का अहम बिंदु
अधिकारियों के अनुसार, संबंधित दस्तावेज पर राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों की सहमति दर्ज है। इनमें भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीएलए भी शामिल बताए जा रहे हैं। एसआईआर प्रक्रिया के तहत सत्यापन के बाद ऐसे मामलों को ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज किया जाता है।
हालांकि, ड्राफ्ट सूची में किसी मतदाता की स्थिति ‘शिफ्टेड’ दर्ज होना अंतिम फैसला नहीं माना जाता। संबंधित व्यक्ति को दावा और आपत्ति दाखिल करने का अवसर मिलता है। दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद अंतिम मतदाता सूची में स्थिति स्पष्ट की जाती है।
सांसदों के लिए क्या है नियम?
एसआईआर के दिशा-निर्देशों में सांसदों और विधायकों सहित कुछ विशेष श्रेणी के मतदाताओं के लिए अलग प्रावधान हैं। ऐसे मामलों में केवल गणना फॉर्म जमा नहीं होने के आधार पर नाम को अंतिम रूप से हटाने के बजाय दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के तहत मामला देखा जा सकता है।
इसलिए राघव चड्ढा की वोट को ड्राफ्ट सूची में ‘शिफ्टेड’ दर्ज किए जाने का मतलब यह नहीं है कि उनका मतदाता पंजीकरण अंतिम रूप से समाप्त हो गया है। अंतिम निर्णय दावा-आपत्ति और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
राघव चड्ढा ने बताया राजनीतिक प्रतिशोध
राघव चड्ढा ने इस मामले को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। उनका कहना है कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सदस्य हैं और उनका वोटर आईडी मोहाली में पंजीकृत है। इसके बावजूद ड्राफ्ट मतदाता सूची में उन्हें ‘शिफ्टेड’ दर्ज किया गया।
चड्ढा ने यह भी कहा कि अभी अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित नहीं हुई है और वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत इस फैसले के खिलाफ आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।
AAP ने पंजाब सरकार की भूमिका से किया इनकार
आम आदमी पार्टी ने चड्ढा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़ी पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है। पार्टी नेताओं हरपाल सिंह चीमा और अमन अरोड़ा ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या स्थानांतरित करने का फैसला राज्य सरकार नहीं करती।
AAP नेताओं ने राघव चड्ढा पर भी सवाल उठाते हुए उनके दिल्ली के राजिंदर नगर में मतदाता पंजीकरण से जुड़े मामले की जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
राज्यसभा सदस्यता को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
राघव चड्ढा की मोहाली वाली वोट ‘शिफ्टेड’ दर्ज होने के बाद उनकी राज्यसभा सदस्यता को लेकर भी राजनीतिक सवाल उठने लगे हैं। विवाद की वजह यह है कि राज्यसभा चुनाव के समय उनके मतदाता पंजीकरण और वर्तमान मतदाता सूची की स्थिति को लेकर अब सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि चड्ढा ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले अपना मतदाता पंजीकरण दिल्ली के राजिंदर नगर से पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) में स्थानांतरित कराया था। अब यदि पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनकी स्थिति ‘शिफ्टेड’ है और दिल्ली के पुराने पंजीकरण की स्थिति भी अलग है, तो विपक्ष की ओर से उनकी राज्यसभा सदस्यता की पात्रता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, ड्राफ्ट मतदाता सूची में ‘शिफ्टेड’ दर्ज होना अपने आप में राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने का आधार नहीं है। इस मामले में अंतिम मतदाता सूची, संबंधित दस्तावेजों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।













