August 31, 2026 Fact Recorder
National Desk: भारत में समय को लेकर सरकार ने नई व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाया है। उपभोक्ता मामले विभाग ने Legal Metrology (Indian Standard Time) Rules, 2026 जारी किए हैं। इसका मकसद देशभर में एक समान और सटीक Indian Standard Time (IST) को बढ़ावा देना है। नए नियम गजट में प्रकाशित होने के 180 दिन बाद लागू होंगे।
क्या है ‘वन नेशन, वन टाइम’ का मतलब?
सरल भाषा में समझें तो सरकार चाहती है कि देश की सरकारी, कानूनी, कारोबारी और डिजिटल व्यवस्थाएं एक ही आधिकारिक समय मानक से जुड़ी हों। अभी अलग-अलग डिजिटल सिस्टम और नेटवर्क अपने-अपने टाइम सर्वर या स्रोतों से समय लेते हैं, जिससे कभी-कभी कुछ सेकंड का अंतर देखने को मिल सकता है।
नई व्यवस्था के तहत आधिकारिक IST को देश के अलग-अलग सिस्टम तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।
क्या आम लोगों को अपनी घड़ी बदलनी पड़ेगी?
नहीं। आम लोगों को अपनी घड़ी या मोबाइल का समय हाथ से बदलने की जरूरत नहीं होगी। मौजूदा IST ही जारी रहेगा। बदलाव मुख्य रूप से बैकएंड सिस्टम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में होगा, ताकि अलग-अलग डिवाइस और नेटवर्क अधिक सटीक आधिकारिक समय से सिंक्रोनाइज हो सकें।
बैंकिंग से लेकर रेलवे तक होगा फायदा
एक समान और सटीक टाइमिंग से कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समन्वय बेहतर हो सकता है। इनमें शामिल हैं:
- बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट की सटीक टाइम-स्टैम्पिंग
- रेलवे, एयरपोर्ट और अन्य परिवहन सेवाओं का बेहतर समन्वय
- टेलीकॉम और इंटरनेट नेटवर्क
- बिजली और पावर ग्रिड सिस्टम
- सरकारी एवं कानूनी रिकॉर्ड
- साइबर अपराध और अन्य जांच में घटनाओं की टाइमलाइन
- शेयर बाजार और अन्य समय-संवेदनशील वित्तीय गतिविधियां
विदेशी टाइम सोर्स पर निर्भरता होगी कम
सरकार देश में आधिकारिक भारतीय समय को सुरक्षित तरीके से उपलब्ध कराने के लिए स्वदेशी तकनीक और संस्थागत नेटवर्क को मजबूत कर रही है। इसमें CSIR-NPL, ISRO और NavIC जैसी भारतीय क्षमताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण डिजिटल और रणनीतिक प्रणालियों को विदेशी टाइमिंग स्रोतों पर निर्भरता से कम करना और देश में एक भरोसेमंद टाइमिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है।
‘व्हाइट रैबिट’ तकनीक का भी हुआ प्रदर्शन
इस दिशा में जुलाई 2026 में बेंगलुरु की लैब में ‘White Rabbit’ तकनीक का प्रदर्शन किया गया। इसके जरिए सटीक भारतीय मानक समय को सुरक्षित तरीके से अलग-अलग स्थानों और महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंचाने की क्षमता दिखाई गई।
बताया गया कि बैंकिंग, टेलीकॉम, बिजली, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल की संभावनाएं हैं। बेंगलुरु से चेन्नई स्थित NSE तक सुरक्षित IST ट्रांसमिशन का प्रदर्शन भी किया गया।
180 दिन की तैयारी क्यों?
नए नियम तत्काल लागू नहीं होंगे। इसके लिए 180 दिनों का समय दिया गया है, ताकि कंपनियां और संस्थान अपने सिस्टम की जांच कर सकें, तकनीकी बदलाव कर सकें और आधिकारिक IST आधारित व्यवस्था के लिए तैयार हो सकें।
यानी आम भारतीयों की घड़ी में कोई नया समय लागू नहीं होगा। बदलाव इस बात में होगा कि देश के महत्वपूर्ण डिजिटल और सरकारी सिस्टम समय को किस आधिकारिक स्रोत से सिंक्रोनाइज करेंगे।













