August 21,2026 Fact Recorder
Punjab Desk: समुद्री जहाज पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक मरीन इंजीनियर से 3.70 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने के बाद युवक को छह महीने तक वियतनाम में फंसाकर रखा गया। इस दौरान उसे एक दिन के लिए भी समुद्री जहाज पर काम नहीं दिया गया।
परिवार को लगातार यह भरोसा दिलाया जाता रहा कि जल्द ही जहाज पर नौकरी मिल जाएगी। काफी समय बीतने के बाद भी जब नौकरी नहीं मिली तो परिवार ने कंपनी से संपर्क किया, लेकिन उन्हें लगातार नए बहाने बनाकर टाल दिया गया।
मामले में उपभोक्ता आयोग ने मुंबई की गुड रिजल्ट मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और अल्माइटी मैरिटाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में लापरवाही का दोषी माना है। आयोग ने दोनों कंपनियों पर कुल तीन लाख रुपये का हर्जाना लगाया है।
विज्ञापन देखकर कंपनी से किया था संपर्क
शिकायतकर्ता के अनुसार सितंबर 2019 में उन्होंने समुद्री जहाज पर नौकरी से संबंधित एक विज्ञापन देखा था। इसके बाद उन्होंने गुड रिजल्ट मरीन सर्विसेज से संपर्क किया। कंपनी की ओर से नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया और इसके बदले उनसे 3.70 लाख रुपये लिए गए।
इसके बाद उन्हें चेन्नई से वियतनाम भेजा गया। वियतनाम पहुंचने पर कंपनी से जुड़े कृष्णा माधव झा ने उन्हें एयरपोर्ट पर रिसीव किया और एक होटल ले गया। आरोप है कि वहां उनका पासपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए गए। उनसे 3 हजार अमेरिकी डॉलर भी लिए गए।
जहाज पर भेजने के बजाय हॉस्टल में रखा
अगले दिन उन्हें जहाज पर ले जाने के बजाय एक घरनुमा हॉस्टल में पहुंचा दिया गया। वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि वह अकेले नहीं हैं। करीब 30 से 40 अन्य नाविक भी वहां मौजूद थे, जिन्हें कथित तौर पर इसी तरह नौकरी का भरोसा देकर वियतनाम लाया गया था।
सभी लोगों को कुछ कमरों में रखा गया था। शिकायत के मुताबिक, वहां कुछ लोग एक दिन से जबकि कुछ लोग कई महीनों से फंसे हुए थे। रहने की परिस्थितियां भी बेहद खराब थीं और कई बार पर्याप्त खाना तक नहीं मिलता था।
परिवार को भी लगातार दिया गया झूठा भरोसा
शिकायतकर्ता ने अपने पिता को फोन कर पूरी स्थिति बताई। इसके बाद पिता ने एजेंसी से संपर्क किया तो उन्हें हर बार यही कहा गया कि जहाज जल्द ही आएगा। कभी जहाज के एक सप्ताह में आने की बात कही गई तो कभी दस्तावेज तैयार होने का हवाला दिया गया।
इसी तरह करीब दो महीने बीत गए। दिसंबर 2019 में पिता ने मुंबई में कंपनी के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज करवाने की बात कही। इसके बाद भी कंपनी की ओर से उन्हें आश्वासन दिया जाता रहा।
बाद में कोरोना महामारी के कारण परिस्थितियां और बिगड़ गईं। इसके बाद शिकायतकर्ता भारत लौट आए और उन्होंने संबंधित कंपनियों के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद दोनों कंपनियों को सेवा में कमी और लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना तथा तीन लाख रुपये का हर्जाना लगाया।













