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चंडीगढ़ के 42 हजार मकानों को बड़ी राहत: नीड बेस्ड चेंज नियमित होंगे, मार्च के पहले हफ्ते नई अधिसूचना

25 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Chandigarh Desk: चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के करीब 42 हजार मकानों में किए गए नीड बेस्ड चेंज को नियमित करने का रास्ता साफ हो गया है। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने इस संबंध में नई नीति को मंजूरी दे दी है। प्रशासन मार्च के पहले सप्ताह तक इसकी नई अधिसूचना जारी कर सकता है।

शहर में सीएचबी के कुल लगभग 62 हजार मकान हैं, जिनमें बड़ी संख्या में निवासियों ने समय-समय पर जरूरत के अनुसार निर्माण या बदलाव कराए हैं। लंबे समय से इन बदलावों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी, जिसे अब खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।

सूत्रों के अनुसार प्रशासन 3 जनवरी 2023 की उस अधिसूचना को दोबारा लागू करेगा, जिसे Supreme Court of India के आदेश के बाद 10 जनवरी 2023 को स्थगित कर दिया गया था। हालांकि, नए ड्राफ्ट में पहले शामिल क्लॉज-20 और क्लॉज-22 को हटाया गया है। मुख्य सचिव एवं सीएचबी चेयरमैन एच. राजेश प्रसाद द्वारा तैयार संशोधित ड्राफ्ट को प्रशासक की स्वीकृति मिल चुकी है।

क्यों हटाए गए क्लॉज-20 और 22
क्लॉज-20 के तहत ओबीपीएएस के जरिए स्व-प्रमाणन योजना में लिफ्ट लगाने की अनुमति दी गई थी, जिसमें ब्लॉक के अन्य आवंटियों से आनुपातिक लागत साझा करने का विकल्प था। वहीं क्लॉज-22 में स्वतंत्र मकानों पर चंडीगढ़ बिल्डिंग रूल्स (अर्बन), 2017 लागू करने का प्रावधान था। नई अधिसूचना में ये दोनों प्रावधान शामिल नहीं होंगे।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश बना आधार
सुप्रीम कोर्ट ने पहले निर्देश दिए थे कि चंडीगढ़ में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में किसी तरह की बढ़ोतरी न की जाए और यथास्थिति बनाए रखी जाए। इसी कारण नीड बेस्ड चेंज की नीति पर रोक लगी थी। बीते महीने गठित 11 सदस्यीय समिति ने नीति की समीक्षा कर रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद प्रशासक ने सैद्धांतिक मंजूरी दी।

नई अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सेक्टर-46, 43, 38 (वेस्ट) और मनीमाजरा जैसे इलाकों में अलग-अलग संरचना वाले स्वतंत्र मकानों पर एक समान नियम लागू नहीं किए जाएंगे।

आवंटियों की चिंता बरकरार
हालांकि, आवंटी संगठनों का कहना है कि नीड बेस्ड चेंज को नियमित करना राहत भरा कदम है, लेकिन पहले दी गई छूट को खत्म नहीं किया जाना चाहिए। उनका सुझाव है कि यदि नए नियम लागू करने हैं तो वे आगे की तारीख से प्रभावी हों, ताकि पुराने मामलों में अनावश्यक नोटिस न भेजे जाएं।

प्रशासन की यह पहल यदि स्पष्ट और विवादमुक्त तरीके से लागू होती है, तो चंडीगढ़ के हजारों आवंटियों को बड़ी राहत मिल सकती है।