September 03,2026 Fact Recorder
National Desk: अयोध्या स्थित राम मंदिर की व्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव किया गया है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार मंदिर के लिए CEO की नियुक्ति की है। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब मंदिर से जुड़े चंदा चोरी प्रकरण को लेकर जांच और कार्रवाई का दौर चल रहा है।
जितेंद्र मिश्रा जल्द अयोध्या पहुंचकर अपना कार्यभार संभालेंगे। बताया गया है कि अयोध्या पहुंचने के बाद वह सबसे पहले रामलला के दर्शन करेंगे और इसके बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर मंदिर की मौजूदा व्यवस्थाओं और संचालन को समझेंगे।
CEO सीधे महासचिव को करेंगे रिपोर्ट
CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में भी अहम बदलाव हुआ है। नई व्यवस्था के तहत राम मंदिर के CEO मंदिर के प्रबंधन और संचालन से जुड़े कार्यों को संभालेंगे और सीधे ट्रस्ट के महासचिव को रिपोर्ट करेंगे।
ट्रस्ट की ओर से गोविंद देव गिरि को नया पूर्णकालिक महासचिव नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस बदलाव के बाद मंदिर ट्रस्ट में प्रशासनिक स्तर पर गोविंद देव गिरि की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है।
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा के मुताबिक, ट्रस्ट का मुख्य काम नीति निर्धारण करना है, जबकि मंदिर के दैनिक प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी CEO के स्तर पर होगी। उन्होंने बताया कि CEO पद को लेकर चर्चा पिछले कई वर्षों से चल रही थी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों के बीच नियुक्ति की प्रक्रिया में तेजी आई।
एक-दो दिन में अयोध्या पहुंचेंगे नए CEO
बजरंग लाल बागड़ा के अनुसार, नवनियुक्त CEO जितेंद्र मिश्रा जल्द अयोध्या पहुंचेंगे। वहां वह पहले रामलला के दर्शन करेंगे और फिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद वह अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे।
CEO के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति ने कई नामों पर विचार करने के बाद तीन नाम ट्रस्ट को सौंपे थे। इनमें जितेंद्र मिश्रा का नाम सबसे ऊपर था और अंततः उन्हीं के नाम पर सहमति बनी।
चंपत राय की अब क्या होगी भूमिका?
ट्रस्ट में नए महासचिव और CEO की नियुक्ति के बाद सबसे बड़ा सवाल चंपत राय की भूमिका को लेकर उठ रहा है। चंपत राय लंबे समय तक राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव रहे और राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
हालांकि, मौजूदा बदलावों के बाद अयोध्या में उनकी सक्रिय भूमिका को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है। बजरंग लाल बागड़ा के मुताबिक, चंपत राय आने वाले समय में देश के अलग-अलग राज्यों में प्रवास कर विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे।
बागड़ा ने यह भी कहा कि चंपत राय 82 वर्ष के हो चुके हैं और संगठन में जिम्मेदारियां उम्र और स्थिति को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं। वह अभी भी VHP के केंद्रीय उपाध्यक्ष हैं और संगठन में आगे भी सक्रिय रहेंगे।
इससे संकेत मिल रहे हैं कि चंपत राय की राम मंदिर ट्रस्ट में फिलहाल किसी सक्रिय प्रशासनिक भूमिका में वापसी की संभावना कम है।
नई नियुक्तियों में अशोक सिंघल फाउंडेशन कनेक्शन
राम मंदिर ट्रस्ट में हुए बदलावों के बीच अशोक सिंघल फाउंडेशन से जुड़े लोगों की भूमिका भी चर्चा में है। महेश भगचंदका को नया ट्रस्टी और कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वह अशोक सिंघल फाउंडेशन के फाउंडर-ट्रस्टी बताए जाते हैं और दिवंगत VHP नेता अशोक सिंघल के करीबी रहे हैं।
वहीं, नए महासचिव गोविंद देव गिरि का भी अशोक सिंघल फाउंडेशन से जुड़ाव बताया गया है। वह संस्था की टीम में संरक्षक की भूमिका में हैं।
दूसरी ओर, चंपत राय भी इस फाउंडेशन से जुड़े रहे हैं। ऐसे में राम मंदिर ट्रस्ट के पुराने और नए पदाधिकारियों के बीच अशोक सिंघल फाउंडेशन का संबंध एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर सामने आ रहा है।
कुल मिलाकर, CEO की नियुक्ति, नए महासचिव और कोषाध्यक्ष के चयन के साथ राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है। नई व्यवस्था में CEO मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि ट्रस्ट नीति निर्धारण पर केंद्रित रहेगा।











