25 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Chandigarh Desk: IDFC First Bank से जुड़े हरियाणा सरकार के खातों में 583 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी के मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Anti Corruption Bureau Haryana) ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में मास्टरमाइंड बताए जा रहे बैंक मैनेजर रिभव ऋषि भी शामिल हैं।
एसआईटी प्रमुख डीएसपी शुक्रपाल ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि चारों आरोपियों का देर रात पंचकूला सिविल अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया।
एसीबी द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पंचकूला सेक्टर-20 निवासी रिभव ऋषि, उसका दोस्त अभय कुमार, चंडीगढ़ निवासी फर्म निदेशक अभिषेक सिंगला और स्वाति सिंगला शामिल हैं। जांच एजेंसी को शुरुआती दौर से ही इन पर संदेह था, जिसके बाद मोहाली, जीरकपुर और अन्य स्थानों पर लगातार छापेमारी कर सबूत जुटाए गए।
दोस्ती से शुरू हुई साजिश
सूत्रों के मुताबिक रिभव ऋषि पहले चंडीगढ़ स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा में मैनेजर था, बाद में वह AU Small Finance Bank की जीरकपुर शाखा में मैनेजर बन गया। सरकारी अधिकारियों से उसकी पहचान थी। उसने अपने दोस्त अभय कुमार के साथ मिलकर सरकारी धन गबन की योजना बनाई।
बोगस फर्म के जरिए रकम ट्रांसफर
आरोप है कि अभय कुमार ने अपनी बहन स्वाति सिंगला और बहनोई अभिषेक सिंगला को भी इस साजिश में शामिल किया। अभय और स्वाति के नाम पर ‘स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट’ नाम से एक बोगस फर्म बनाई गई, जिसके जरिए हरियाणा सरकार के खातों से रकम ट्रांसफर कर गबन किया गया।
जल्दी अमीर बनने की चाह
पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी जल्दी अमीर बनने की चाह में अलग-अलग बैंकों में नौकरी करते रहे। दोनों आरोपी शेयर बाजार के चर्चित घोटालेबाज हर्षद मेहता को अपना आदर्श मानते थे।
24 घंटे में लौटी सरकारी रकम
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में बताया कि धोखाधड़ी सामने आने के 24 घंटे के भीतर बैंक ने पूरी राशि ब्याज सहित सरकार को लौटा दी। बैंक की ओर से 556.15 करोड़ रुपये जमा कराए गए, जिसमें 22 करोड़ रुपये ब्याज शामिल है। हालांकि बैंक के अनुसार कुल 583 करोड़ रुपये लौटाए गए हैं।
उच्चस्तरीय समिति करेगी जांच
मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्त सचिव अरुण गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो यह जांच करेगी कि लापरवाही कहां हुई और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। समिति बैंक कर्मचारियों और सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करेगी। सरकार ने साफ किया है कि इस मामले में दोषी कोई भी व्यक्ति—चाहे बैंक कर्मचारी हो या सरकारी अधिकारी—बख्शा नहीं जाएगा।











