29 जनवरी, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Punjab Desk: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रोहतक के सेक्टर-6 में स्थित 38 एकड़ के प्राकृतिक जंगल की कटाई पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने इस क्षेत्र को वाणिज्यिक जोन में बदलने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई।
यह इलाका शहर के बीचोंबीच स्थित है और इसे रोहतक का ‘हरा फेफड़ा’ कहा जाता है। याचिका के अनुसार यहां वर्ष 2002 से स्वाभाविक रूप से विकसित हुए 12 हजार से अधिक पेड़ मौजूद हैं।
बिना केंद्र की मंजूरी शुरू हुई कटाई
जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का उल्लंघन करते हुए केंद्र सरकार की अनुमति के बिना ही 19 जनवरी से पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार का उल्लंघन बताया।
एनजीटी न जाने पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का रुख क्यों नहीं किया, जबकि हरियाणा सरकार की वर्ष 2025 की अधिसूचना से जुड़ा मामला वहां पहले से लंबित है।
मुख्य न्यायाधीश ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा—
“30 साल पुराने पेड़ क्यों काट रहे हो? तुम्हारे बच्चे-पोते क्या सांस नहीं लेंगे?”
कटाई पर पूर्ण रोक, अनुमति का विवरण तलब
खंडपीठ ने अधिकार क्षेत्र के प्रश्न को सुरक्षित रखते हुए हरियाणा सरकार और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि यदि वृक्ष कटाई की कोई अनुमति ली गई है तो उसका पूरा विवरण अदालत में पेश किया जाए।
अदालत ने अगली सुनवाई तक क्षेत्र में किसी भी प्रकार की वृक्ष कटाई पर पूर्ण रोक लगा दी है। अगली तारीख पर यह तय किया जाएगा कि मामला हाईकोर्ट में ही सुना जाएगा या इसे एनजीटी को स्थानांतरित किया जाएगा।











