हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: दिव्यांग सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 60 से घटाकर 58 साल की

04 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Haryana Desk:  हरियाणा सरकार ने दिव्यांग (PwD) सरकारी कर्मचारियों से जुड़े सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए उनकी सेवानिवृत्ति आयु घटाने का फैसला किया है। सरकार ने हरियाणा सिविल सेवा (जनरल) नियम, 2016 में संशोधन कर दिव्यांग कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 60 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष कर दी है। यह आदेश वित्त विभाग (Finance Regulation Branch) की ओर से जारी किया गया है और आधिकारिक गजट में प्रकाशित होते ही प्रभावी माना जाएगा।

किस नियम में किया गया संशोधन

सरकार ने यह बदलाव Rule 143 के तहत किया है। पहले नियमों के अनुसार 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग कर्मचारी, नेत्रहीन कर्मचारी, ग्रुप ‘D’ कर्मचारी और न्यायिक अधिकारियों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति थी। नए संशोधन के बाद दिव्यांग कर्मचारियों को दी गई यह विशेष छूट समाप्त कर दी गई है।

अब क्या होंगे नए रिटायरमेंट नियम

संशोधन के बाद दिव्यांग सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु अब 58 वर्ष होगी, जो सामान्य सरकारी कर्मचारियों के बराबर है। यानी PwD कर्मचारियों को अब 60 वर्ष तक सेवा में बने रहने का अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा।
हालांकि, सरकार ने यह प्रावधान रखा है कि जनहित या असाधारण परिस्थितियों में किसी कर्मचारी को सेवा में बनाए रखने का निर्णय केवल मंत्रिमंडल (Council of Ministers) की मंजूरी से ही लिया जा सकेगा।

किन प्रावधानों को हटाया गया

गजट अधिसूचना के जरिए सरकार ने Rule 143 की clause (i), clause (ii), Note-1 और Note-3 को पूरी तरह हटा दिया है। इन्हीं प्रावधानों के तहत दिव्यांग कर्मचारियों को 60 वर्ष तक सेवा में रहने की अनुमति मिलती थी।

आदेश का विवरण

यह आदेश No. 11/58/2023-1FR के तहत 03 फरवरी 2026 को जारी किया गया है। अधिसूचना पर हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से अधिकृत हस्ताक्षर किए गए हैं।

कर्मचारियों में नाराज़गी की संभावना

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस फैसले को लेकर दिव्यांग कर्मचारी संगठनों में नाराज़गी देखने को मिल सकती है। संगठनों का कहना है कि पहले दी गई यह छूट सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित थी, जिसे अचानक समाप्त करना उचित नहीं है।
आने वाले दिनों में इस फैसले के खिलाफ प्रतिनिधिमंडल सौंपने, विरोध प्रदर्शन या कानूनी चुनौती की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा।