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गुरुग्राम की भौंडसी जेल में पहुंचे हाईकोर्ट के जस्टिस।
गुरुग्राम में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव बेरी ने भौंडसी स्थित जिला कारागार दौरा किया और बंदियों से बातचीत की। इस दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष मेहला भी मौजूद रहे।
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जस्टिस बेरी ने बंदियों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी कानूनी समस्याओं और न्याय तक उनकी पहुंच में आने वाली बाधाओं को समझने का प्रयास किया।
इस दौरान उन्होंने बंदियों के लिए शुरू की गई तीन योजनाओं के बारे में जानकारी दी। जिनमें पहली ‘न्याय सेतु है, यह दो महीने तक चलने वाला एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य बंदियों को न्यायिक प्रक्रिया से जोड़ने के लिए एक व्यवस्थित और डेटा आधारित दृष्टिकोण अपनाना है।
इसके तहत विशेष कानूनी सहायता दल जेल में बंदियों के साथ व्यक्तिगत बातचीत करेंगे, उनकी जमानत या अपील योग्य मामलों की पहचान करेंगे, आवश्यक दस्तावेज तैयार करेंगे और सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट की विधिक सेवा समितियों से समन्वय स्थापित कर प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेंगे।
महिलाओं के लिए कानूनी सहायता क्लिनिक
दूसरी पहल संगिनी है, जिसमें महिला बंदियों के लिए ‘कानूनी सहायता क्लिनिक’ के रूप में शुरू की गई है। यह क्लिनिक जेल के महिला वार्ड में स्थापित किया गया है, जहां एक विशेष महिला पैरा-लीगल स्वयंसेवी की नियुक्ति की गई है।
इसके अलावा, नियमित अंतराल पर महिला अधिवक्ताओं द्वारा भी वहां कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि महिला बंदियों को गोपनीय और संवेदनशील कानूनी सहायता मिल सके।
दिव्यांगों के लिए न्याय सहायता केंद्र
जबकि तीसरी योजना दिव्यांग न्याय सहायता केंद्र के रूप में जिला न्यायालय परिसर में शुरू की गई है। यह केंद्र विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए बनाया गया है, जहां उन्हें व्हीलचेयर सहायता, कानूनी परामर्श और अदालती प्रक्रियाओं में सहयोग प्रदान किया जाएगा। यह पहल न्याय प्रणाली को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि इन तीनों पहल का उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 39A की भावना को साकार करना और गुरुग्राम में कानूनी सहायता प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाना है।











