October 26,2026 Fact Recorder
Business Desk: सोने और चांदी की कीमतों में बीते सप्ताह बड़ी गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का भाव ₹2 लाख प्रति किलो से नीचे आ गया, जबकि सोना करीब 4 फीसदी टूटकर ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है, जिसके फैसले से कीमती धातुओं की आगे की दिशा तय हो सकती है।
MCX पर सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट
घरेलू वायदा बाजार में बीते सप्ताह सोने और चांदी पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। दिसंबर डिलीवरी वाला सोना ₹5,768 की गिरावट के साथ करीब ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इस दौरान सोने की कीमत में लगभग 4 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
वहीं, चांदी की कीमत में इससे भी बड़ी गिरावट आई। MCX पर चांदी ₹15,087 यानी 7.14 फीसदी टूटकर करीब ₹1.96 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई। इस गिरावट के साथ चांदी ₹2 लाख के अहम स्तर से नीचे फिसल गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। कॉमेक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना करीब 4.14 फीसदी गिरकर 4,007.9 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं, चांदी लगभग 6 फीसदी टूटकर 53.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई महंगाई की चिंता
सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं। ब्रेंट क्रूड का भाव 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से वैश्विक महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
कच्चा तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इससे महंगाई पर दबाव पड़ता है और केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं।
ऐसी स्थिति में निवेशकों के लिए बॉन्ड और डॉलर जैसे विकल्प आकर्षक हो सकते हैं, जबकि सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव बढ़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में गिरावट की एक वजह औद्योगिक मांग को लेकर चिंता भी है। चांदी का इस्तेमाल कई उद्योगों में होता है, इसलिए औद्योगिक गतिविधियों में कमजोरी इसकी कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
27-28 अक्टूबर को फेडरल रिजर्व की बैठक पर नजर
अब बाजार की नजर 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है। फेडरल रिजर्व ब्याज दरों और भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर क्या संकेत देता है, इसका असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है।
अगर फेडरल रिजर्व महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाता है और ब्याज दरें ऊंची रहने के संकेत देता है, तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड मजबूत हो सकते हैं। इससे सोने-चांदी की कीमतों पर और दबाव पड़ने की आशंका रहेगी।
इसके विपरीत, यदि फेड का रुख नरम रहता है और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ती है, तो कीमती धातुओं को राहत मिल सकती है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान के फैसलों के साथ अमेरिका के आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
क्या अभी और सस्ता होगा सोना-चांदी?
सोने और चांदी में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। हालांकि, कीमतें कितनी नीचे जाएंगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक मांग बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक होंगे।
निवेशकों के लिए सलाह: केवल हालिया गिरावट देखकर खरीदारी का फैसला न करें। निवेश से पहले अपनी जरूरत, जोखिम उठाने की क्षमता और बाजार की स्थिति को ध्यान में रखें। सोना-चांदी की वायदा कीमतें और स्थानीय सर्राफा बाजार के भाव अलग-अलग हो सकते हैं।











