Gadiya Lohaar came out like a groom on his last journey | अलवर में समाज के पंच की अंतिम यात्रा में हाथी-घोड़े: धोती-कुर्ता और चश्मा पहनाया, नाचते-गाते चले किन्नर; 3 राज्यों के 4 जिलों से आए लोग – Alwar News

गाड़िया लोहारों के पंच की अंतिम यात्रा देखने शहर के लोग छतों पर उमड़ पड़े। इस अंतिम यात्रा में 3 राज्यों के 4 जिलों से आए प्रबुद्धजन शामिल हुए। अंतिम यात्रा के लिए जयपुर से हाथी, घोड़े और ऊंट बुलाए गए थे। इसके साथ ही पंच को सजाया गया। उन्हें अर्थी पर बैठ

रोहिताश ने बताया- उनके पिताजी अलवरिया लुहार (रिछपाल) का 18 मार्च को निधन हो गया था। वे 90 साल के थे। वे गाड़िया लोहारों के पंच थे, उनका काम समाज के काम के लिए जगह-जगह घूमना था। ऐसे में हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के समाजजनों ने खास तरीके से उनकी यात्रा निकालने की ठानी थी।

तस्वीरों में देखिए गाड़िया लोहार की यात्रा की दिलचस्प तस्वीरें…

तस्वीर, अलवर की है जहां से रिछपाल की अंतिम यात्रा निकाली गई।

तस्वीर, अलवर की है जहां से रिछपाल की अंतिम यात्रा निकाली गई।

अंतिम यात्रा में चल रहे लोगों ने गुलाल उड़ाया और बारातियों की तरह डांस किया।

अंतिम यात्रा में चल रहे लोगों ने गुलाल उड़ाया और बारातियों की तरह डांस किया।

रिछपाल को अर्थी पर बैठाया गया था। उन्हें धोती-कुर्ता और चश्मा पहनाया गया था।

रिछपाल को अर्थी पर बैठाया गया था। उन्हें धोती-कुर्ता और चश्मा पहनाया गया था।

3 राज्यों से आए समाजजन

बेटे रोहिताश ने बताया- उनके निधन के पर दिल्ली, गुरुग्राम, अलवर और जयपुर सहित कई जगहों से समाज के लोग शामिल हुए। सभी ने तय किया कि रिछपाल अलवरिया लोहार की अंतिम यात्रा खास तरीके से निकलेंगे। फिर समाज के सब लोगों ने पैसे एकत्रित किए। जयपुर से हाथी, घोड़े व ऊंट बुलाए। अर्थी को बेहद आकर्षक सजाया।

बेटे ने बताया-

उद्धरण

पिताजी को नया धोती-कुर्ता और चश्मा पहना कर अर्थी पर बैठाया गया। उसके बाद गाजे-बाजे के साथ बड़ी संख्या में समाजजन अलवर शहर के अग्रसेन सर्किल, भगत सिंह सर्किल से स्वर्ग रोड होते हुए तीजकी श्मशान घाट लेकर गए।

उद्धरण

छतों पर उमड़े लोग

बता दें कि शहर के बीच से जब यह यात्रा निकली तो लोग छतों पर देखने के लिए उमड़ पड़े। पहले तो लोगों को समझ नहीं आया लेकिन, राम नाम सत्य है सुना तो उन्हें समझ आया कि यह अंतिम यात्रा है। अंतिम यात्रा में सबसे आगे किन्नर नाचते-गाते चल रहे थे। वहीं इसके बाद रिछपाल की अर्थी लिए 4 लोग चल रहे थे। वहीं समुदाय (गाड़िया लोहार) के बच्चे और बड़े गुलाल उड़ाते हुए बाराती की तरह नाचते-गाते चले। रिछपाल के 5 बेटे और दो बेटियां है। सभी लोहे का काम करते हैं।