15 June 2026 Fact Recorder
Bollywood Desk: हिंदी सिनेमा की दो सबसे यादगार फिल्मों में शामिल ‘गदर: एक प्रेम कथा’ और ‘लगान’ ने रिलीज के 25 साल पूरे कर लिए हैं। 15 जून 2001 को एक ही दिन सिनेमाघरों में रिलीज हुई इन दोनों फिल्मों ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में भी अपनी अलग पहचान बनाई। आज भी इन फिल्मों को दर्शक उतनी ही दिलचस्पी से देखते हैं जितनी रिलीज के समय देखते थे।
इन फिल्मों की सफलता के साथ-साथ इनके मुख्य कलाकारों की फीस को लेकर भी चर्चा होती रही है। खास बात यह है कि फीस के मामले में ‘गदर’ के अभिनेता सनी देओल ने ‘लगान’ के अभिनेता आमिर खान को काफी पीछे छोड़ दिया था।
सनी देओल ने ली थी मोटी रकम
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Sunny Deol ने ‘गदर: एक प्रेम कथा’ में तारा सिंह का किरदार निभाने के लिए करीब 4.5 करोड़ रुपये फीस ली थी। उस समय यह बॉलीवुड के सबसे अधिक भुगतान पाने वाले अभिनेताओं में से एक की फीस मानी जाती थी।
निर्देशक Anil Sharma की इस फिल्म का बजट करीब 18 करोड़ रुपये था। फिल्म ने टिकट खिड़की पर शानदार प्रदर्शन करते हुए दुनियाभर में लगभग 132 करोड़ रुपये का कारोबार किया और वर्ष 2001 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हुई।
आमिर खान ने ली थी कम फीस
वहीं Aamir Khan ने ‘लगान’ के लिए केवल करीब 35 लाख रुपये फीस ली थी। इसकी वजह यह थी कि आमिर इस फिल्म में अभिनेता होने के साथ-साथ निर्माता भी थे।
यह उनकी प्रोडक्शन कंपनी का पहला बड़ा प्रोजेक्ट था और फिल्म का निर्माण बजट लगातार बढ़ रहा था। ऐसे में उन्होंने फीस कम रखकर फिल्म के निर्माण पर अधिक ध्यान दिया।
‘लगान’ को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
निर्देशक Ashutosh Gowariker की फिल्म Lagaan का बजट लगभग 24 से 25 करोड़ रुपये था। फिल्म ने दुनियाभर में करीब 66 करोड़ रुपये की कमाई की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हासिल की। इसे अकादमी पुरस्कार (ऑस्कर) में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी के लिए नामांकित किया गया था।
दूसरी ओर Gadar: Ek Prem Katha ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल करते हुए कमाई के मामले में ‘लगान’ को पीछे छोड़ दिया था।
फीस में था बड़ा अंतर
उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘गदर’ के लिए सनी देओल को लगभग 4.5 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि ‘लगान’ के लिए आमिर खान की फीस करीब 35 लाख रुपये थी। यानी दोनों सितारों की फीस में कई करोड़ रुपये का अंतर था। हालांकि, दोनों फिल्मों ने अपनी-अपनी शैली में दर्शकों का दिल जीता और आज भी भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती हैं।













