19 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर इन दिनों विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली की मार झेल रहा है। फरवरी 2026 के पहले 15 दिनों में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने आईटी शेयरों से करीब 10,956 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस अचानक बिकवाली की सबसे बड़ी वजह जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता प्रभाव है, जिसने आईटी कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
चार साल के निचले स्तर पर विदेशी हिस्सेदारी
NSDL की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस बिकवाली के बाद आईटी कंपनियों में विदेशी निवेशकों की कुल हिस्सेदारी घटकर 4.49 लाख करोड़ रुपये रह गई है, जो बीते चार वर्षों का सबसे निचला स्तर है। जनवरी 2026 के अंत में यह आंकड़ा 5.34 लाख करोड़ रुपये था, यानी महज दो-तीन हफ्तों में करीब 16 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। 2025 की शुरुआत में जहां विदेशी होल्डिंग 7.3 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर थी, वहीं अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
AI के डर से टूटा IT सेक्टर
बाजार जानकारों का मानना है कि निवेशकों को डर है कि जिस तेजी से AI कोडिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और आईटी सपोर्ट में सक्षम हो रहा है, उससे भारत की आईटी कंपनियों की मैनपावर आधारित कमाई पर असर पड़ सकता है। इसी आशंका का असर शेयरों पर साफ दिखा है।
फरवरी में अब तक इंफोसिस के शेयर करीब 16.5 फीसदी टूट चुके हैं, जबकि TCS और HCL Technologies में 14 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। Wipro और Tech Mahindra भी 10–12 फीसदी तक लुढ़क चुके हैं। कुल मिलाकर निफ्टी IT इंडेक्स करीब 14 फीसदी गिर चुका है।
अनिश्चितता बढ़ा रही है चिंता
JP Morgan की एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि नई तकनीकों के चलते आईटी सेवाओं की मांग पर क्या असर पड़ेगा, इसका आकलन फिलहाल मुश्किल है। यही अनिश्चितता निवेशकों को सतर्क बना रही है और बिकवाली को बढ़ावा दे रही है।
म्यूचुअल फंड्स को भी नुकसान
इस गिरावट की चपेट में सिर्फ विदेशी निवेशक ही नहीं आए हैं। 13 फरवरी तक टॉप-10 आईटी शेयरों में म्यूचुअल फंड्स का निवेश घटकर 3.04 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो जनवरी के अंत में 3.56 लाख करोड़ रुपये था। अनुमान है कि इस गिरावट से निवेशकों को करीब 50,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
पैसा कहां जा रहा है?
आईटी से निकला पैसा अब दूसरे सेक्टर्स में जा रहा है। इसे बाजार की भाषा में सेक्टर रोटेशन कहा जा रहा है। फरवरी के पहले हिस्से में FIIs ने कैपिटल गुड्स में 8,032 करोड़ रुपये और फाइनेंशियल सर्विसेज में 6,175 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके अलावा मेटल और माइनिंग सेक्टर में भी 3,279 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल विदेशी निवेशक टेक्नोलॉजी की बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और बुनियादी क्षेत्रों को ज्यादा सुरक्षित दांव मान रहे हैं। हालांकि, FMCG और हेल्थकेयर सेक्टर में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।













