16 मार्च 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध अब तीसरे हफ्ते में पहुंच चुका है। इसी बीच ईरान में फंसे करीब 70 भारतीय छात्र और तीर्थयात्री सुरक्षित भारत लौट आए हैं। बमबारी और धमाकों के बीच कई दिन गुजारने के बाद जब ये लोग स्वदेश पहुंचे तो उनके चेहरों पर राहत साफ नजर आई।
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद छात्रों ने युद्ध के दौरान झेली गई दहशत और मुश्किलों के अनुभव साझा किए। 22 वर्षीय नैना तोइबा ने बताया कि भारत पहुंचते ही उन्होंने अपने भाई को फोन कर कहा, “मैं सुरक्षित पहुंच गई हूं, अल्हम्दुलिल्लाह।” उनकी आवाज में लंबे समय बाद मिली राहत साफ झलक रही थी।
नैना उन करीब 70 भारतीयों में शामिल थीं, जिनमें ज्यादातर छात्र जम्मू-कश्मीर से थे। ये सभी लोग ईरान से बाहर निकलने के लिए सड़क और हवाई मार्ग से करीब चार दिन का लंबा सफर तय कर रविवार को फ्लाईदुबई की एक कमर्शियल फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे।
छात्रों ने बताया कि युद्ध के दौरान रातें लड़ाकू विमानों की आवाज और धमाकों से गूंजती रहती थीं। उर्मिया यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही अनंतनाग की रहने वाली नैना ने बताया कि एक बार उनके अपार्टमेंट से महज 200 मीटर की दूरी पर बम धमाका हुआ, जिससे इमारत के शीशे तक टूट गए। डर के कारण उन्हें तुरंत अपने एक दोस्त के अपार्टमेंट में शरण लेनी पड़ी।
इंटरनेट और टीवी की सुविधा न होने के कारण छात्रों को बाहर की स्थिति के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल पा रही थी। ऐसे हालात में उन्होंने पढ़ाई और किताबों के सहारे खुद को संभाले रखा। जैसे-जैसे हालात बिगड़ते गए, छात्रों ने खाने-पीने की जरूरी चीजों का भी स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया।
भारत लौटे छात्रों ने बताया कि हर दिन उन्हें डर रहता था कि कहीं यह उनकी जिंदगी का आखिरी दिन न हो। उन्हें असली राहत तब महसूस हुई जब उन्होंने ईरान-आर्मेनिया सीमा पार कर सुरक्षित क्षेत्र में प्रवेश किया। वहीं से ये लोग येरेवन होते हुए दुबई और फिर दिल्ली पहुंचे।













