07 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Business Desk: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को द्वैमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के फैसलों का ऐलान किया। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया। वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
आम लोगों को राहत, EMI में बदलाव नहीं
रेपो रेट में कोई बदलाव न होने से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI फिलहाल न तो बढ़ेगी और न घटेगी। इससे कर्ज लेने वाले उपभोक्ताओं को स्थिरता और राहत मिलेगी।
डिजिटल धोखाधड़ी पर मिलेगा मुआवजा
बैंकिंग ग्राहकों की सुरक्षा को मजबूत करते हुए RBI ने छोटे मूल्य के अनधिकृत डिजिटल लेनदेन में नुकसान पर ₹25,000 तक मुआवजा देने की व्यवस्था पर काम शुरू करने की घोषणा की है। इससे ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में ग्राहकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही, बैंकों द्वारा मिस-सेलिंग और रिकवरी एजेंटों की बदसलूकी रोकने के लिए सख्त नियम लाने की बात कही गई है। डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए वरिष्ठ नागरिकों हेतु अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन उपाय भी लागू किए जा सकते हैं।
MSME को सस्ता और आसान लोन
छोटे कारोबारियों के लिए RBI ने बड़ा कदम उठाते हुए MSME के बिना गारंटी लोन की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया है। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सस्ती दरों पर कर्ज मिल सकेगा और कारोबार को गति मिलेगी।
रियल एस्टेट और सहकारी बैंकों को बढ़ावा
रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए बैंकों को REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) को लोन देने की अनुमति दी जाएगी।
वहीं, शहरी सहकारी बैंकों को सशक्त बनाने के लिए ‘मिशन सक्षम’ शुरू किया जाएगा, जिसके तहत लगभग 1.4 लाख कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, 1000 करोड़ रुपये से कम संपत्ति वाली और बिना सार्वजनिक धन वाली कुछ NBFCs को पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
ग्रोथ और महंगाई का अनुमान
RBI ने आर्थिक मोर्चे पर भरोसा जताते हुए अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 6.9% और दूसरी तिमाही में 7% रहने का अनुमान दिया है। वहीं, चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई दर 2.1% पर स्थिर रहने की संभावना जताई गई है।
कुल मिलाकर, RBI के ये फैसले उपभोक्ताओं की सुरक्षा, MSME को मजबूती और अर्थव्यवस्था में स्थिर विकास की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।













