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सिर्फ कोयला नहीं, गैस से लेकर लिथियम और सोलर तक 50 हजार करोड़ का दांव लगाएगी Coal India

September 02,2026 Fact Recorder

Business Desk:  देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) अब अपनी पारंपरिक कोयला खनन की पहचान से आगे बढ़ते हुए नए क्षेत्रों में कदम बढ़ा रही है। कंपनी ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और कारोबार के विस्तार को ध्यान में रखते हुए करीब 50,000 करोड़ रुपये के निवेश की बड़ी योजना तैयार की है। इस रकम का इस्तेमाल कोल गैसिफिकेशन, क्रिटिकल मिनरल्स और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।

कोल इंडिया के चेयरमैन बी. साईराम के मुताबिक, कंपनी आने वाले समय में सिर्फ कोयले पर निर्भर रहने के बजाय ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में नए अवसरों पर फोकस करेगी। इसका उद्देश्य नए ग्रोथ इंजन तैयार करने के साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना भी है।

कोल गैसिफिकेशन पर बढ़ा फोकस

कोल इंडिया की नई रणनीति में कोल गैसिफिकेशन को खास महत्व दिया जा रहा है। इस तकनीक के जरिए कोयले को गैस में बदला जाता है, जिसका इस्तेमाल रसायन और अन्य औद्योगिक उत्पाद तैयार करने में किया जा सकता है।

कंपनी का मानना है कि कोल गैसिफिकेशन से प्राकृतिक गैस और कुछ रासायनिक उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही देश में उपलब्ध कोयले का वैकल्पिक तरीके से इस्तेमाल भी संभव होगा।

इस क्षेत्र में कंपनी तकनीकी साझेदारों और दूसरी कंपनियों के साथ मिलकर नए प्रोजेक्ट्स विकसित करने की संभावनाएं तलाश रही है।

ओडिशा में 25 हजार करोड़ से ज्यादा का प्रोजेक्ट

कोल इंडिया का पहला कमर्शियल कोल गैसिफिकेशन प्रोजेक्ट ओडिशा के लखनपुर में शुरू हो चुका है। भारत कोल गैसिफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL) के इस प्रोजेक्ट में मैकेनिकल काम शुरू हो गया है।

यह कोल इंडिया और BHEL का जॉइंट वेंचर है, जिसमें 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है। प्रोजेक्ट में हर साल करीब 6.60 लाख टन अमोनियम नाइट्रेट के उत्पादन की योजना है।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल में GAIL और महाराष्ट्र में BPCL के साथ भी दो अन्य बड़े कोल गैसिफिकेशन प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। फिलहाल ये परियोजनाएं टेंडर प्रक्रिया में हैं।

विदेशों में लिथियम और क्रिटिकल मिनरल्स की तलाश

कोल इंडिया अब क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रही है। कंपनी देश में ग्रेफाइट और दुर्लभ धातुओं से जुड़े पांच ब्लॉक हासिल कर चुकी है।

इसके साथ ही विदेशों में भी खनिज संपत्तियों की तलाश की जा रही है। चिली, अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया में संभावित खदानों को लेकर बातचीत चल रही है। खासतौर पर चिली में लिथियम खदानों के अवसरों पर कंपनी विदेशी साझेदारों के साथ चर्चा कर रही है।

अंतरराष्ट्रीय कारोबार को बढ़ाने और विदेशी परियोजनाओं को संभालने के लिए कोल इंडिया ने सिंगापुर में ‘CIL Global’ नाम से नई इकाई भी स्थापित की है।

सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी पर भी बड़ा दांव

कोल इंडिया की विस्तार योजना में रिन्यूएबल एनर्जी भी अहम हिस्सा है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2030 तक 9.5 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कंपनी कई नए सोलर प्रोजेक्ट्स पर काम करेगी। इनमें बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को भी शामिल करने की योजना है, ताकि जरूरत के समय बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

क्यों अहम है कोल इंडिया की नई रणनीति?

कोल इंडिया का यह विस्तार प्लान कंपनी के कारोबार में बड़े बदलाव का संकेत देता है। कोयले के साथ गैसिफिकेशन, क्रिटिकल मिनरल्स और ग्रीन एनर्जी में निवेश से कंपनी भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहती है। करीब 50,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश के जरिए कंपनी नए कारोबार खड़े करने के साथ भारत की ऊर्जा और खनिज सुरक्षा में भी योगदान देने की कोशिश कर रही है।