03 फरवरी 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: केंद्रीय बजट में उत्तर प्रदेश को मिलने वाली केंद्रीय करों की हिस्सेदारी में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आम तौर पर देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता राज्य होने के कारण यूपी को सेंट्रल जीएसटी से सबसे अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद रहती है, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जारी आंकड़ों में इनकम टैक्स राज्य की सबसे बड़ी आय का स्रोत बनकर उभरा है। यह बदलाव प्रदेश में बढ़ती आय, रोजगार के अवसरों और टैक्स बेस के विस्तार की ओर इशारा करता है।
राज्यवार वितरण तालिका के अनुसार, यूपी को इनकम टैक्स के रूप में करीब 95,698 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। यह राज्य को मिलने वाली कुल केंद्रीय कर हिस्सेदारी का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके बाद कॉरपोरेशन टैक्स से लगभग 78,939 करोड़ रुपये और सेंट्रल जीएसटी से करीब 73,546 करोड़ रुपये मिलने की संभावना जताई गई है। यानी इस बार सीजीएसटी यूपी की शीर्ष आय का स्रोत नहीं रहेगा।
अन्य करों की बात करें तो यूपी को कस्टम ड्यूटी से 14,347 करोड़ रुपये, यूनियन एक्साइज ड्यूटी से 6,111 करोड़ रुपये और अन्य करों व शुल्कों से करीब 267 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। सभी मदों को जोड़ें तो केंद्र के करों में यूपी की कुल हिस्सेदारी 2.68 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने की संभावना है, जो देश में सबसे ज्यादा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इनकम टैक्स से बढ़ी आमदनी इस बात का संकेत है कि प्रदेश में करदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है और लोगों की औसत आय में सुधार आया है। बीते कुछ वर्षों में औद्योगिक निवेश, स्टार्टअप गतिविधियों, एमएसएमई के विस्तार और संगठित रोजगार में बढ़ोतरी से टैक्स नेटवर्क मजबूत हुआ है, जिसका असर अब केंद्र से मिलने वाली कर हिस्सेदारी में साफ नजर आ रहा है।
वहीं, सीजीएसटी में अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी का कारण यह माना जा रहा है कि यूपी भले ही बड़ा उपभोक्ता राज्य हो, लेकिन उत्पादन आधारित राज्यों की तुलना में यहां इनपुट टैक्स क्रेडिट और निर्यात केंद्रित गतिविधियां कम हैं। इसी वजह से जीएसटी से मिलने वाला राजस्व इस बार इनकम टैक्स और कॉरपोरेशन टैक्स से पीछे रह गया है।













