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अनिल अंबानी की बढ़ीं मुश्किलें, ₹8,078 करोड़ की संपत्तियों पर जब्ती का खतरा; ₹40,185 करोड़ के फंड से जुड़ा मामला

August 10,2026 Fact Recorder

Business Desk: अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक नया कदम उठाया है। एजेंसी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) से जुड़े प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) मामले में शनिवार को सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की है। ED के मुताबिक, मामले में कथित तौर पर ₹40,185.55 करोड़ की रकम से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।

ED ने बताया कि यह सप्लीमेंट्री शिकायत 27 मार्च को दाखिल की गई शुरुआती अभियोजन शिकायत के बाद दायर की गई है। एजेंसी ने RCom, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL), गौतम भाईलाल दोषी, सतीश सेठ, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य को PMLA की संबंधित धाराओं के तहत आरोपी बनाया है।

₹40,185 करोड़ की रकम से जुड़ा आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में अपराध से हुई आय का मूल्य करीब ₹40,185.55 करोड़ आंका गया है। यह वह कुल बकाया रकम है जिसे संबंधित कंपनियां बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बॉन्डधारकों को नहीं चुका सकीं।

ED का आरोप है कि फंड जुटाने, उसके इस्तेमाल, ट्रांसफर और कथित तौर पर उसे छिपाने में आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाएं थीं। जांच में फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड (FCCB) के जरिए जुटाए गए करीब 1 अरब डॉलर के अंतिम इस्तेमाल को लेकर कथित तौर पर गलत प्रमाणपत्र जमा किए जाने की बात भी सामने आई है।

₹8,078 करोड़ की संपत्तियों को जब्त करने की मांग

ED ने करीब ₹8,078.06 करोड़ की उन संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है, जिन्हें पहले ही एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी द्वारा अटैच और कन्फर्म किया जा चुका है।

इन संपत्तियों में नई दिल्ली, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे में स्थित लीजहोल्ड और अन्य अचल संपत्तियां शामिल बताई गई हैं। अब इन संपत्तियों को जब्त किए जाने की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है, हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।

दो आरोपी न्यायिक हिरासत में

ED के मुताबिक, इस ECIR के तहत एक आरोपी को 12 जून और सतीश सेठ को 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। PMLA मामलों की विशेष अदालत ने मुख्य अभियोजन शिकायत का 15 जून को संज्ञान लिया था।

CBI की FIR के आधार पर शुरू हुई जांच

ED ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों के आधार पर CBI की बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच, नई दिल्ली द्वारा दर्ज कई FIR के आधार पर जांच शुरू की थी।

ये मामले RCom, RTL और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड द्वारा कथित तौर पर फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं का गलत तरीके से इस्तेमाल करने और बाद में रकम को दूसरी जगह ट्रांसफर करने से जुड़े हैं।

लोन की रकम को दूसरी कंपनियों के जरिए घुमाने का आरोप

जांच में ED ने आरोप लगाया कि स्वीकृत उद्देश्य के बजाय नई क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल मौजूदा घरेलू और विदेशी देनदारियों को चुकाने, पुराने कर्ज को घुमाने और उसे लगातार रिन्यू करने के लिए किया गया।

एजेंसी के अनुसार, इन पैसों को ग्रुप कंपनियों, स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPVs), विभिन्न बैंक खातों और लिक्विड म्यूचुअल फंड्स के जरिए ट्रांसफर किया गया। कथित तौर पर इनका इस्तेमाल मौजूदा एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECBs) और FCCBs की देनदारियां चुकाने के लिए किया गया।

2007 से चलने का दावा

ED के बयान के मुताबिक, जांच में कथित वित्तीय अनियमितताओं की शुरुआत कम से कम वर्ष 2007 से होने की बात सामने आई है। एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद आपस में जुड़े लेनदेन और वित्तीय गतिविधियों की एक श्रृंखला जारी रही।

जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि लोन से प्राप्त रकम को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस कैपिटल समेत अन्य ग्रुप कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। इसके अलावा प्रमोटरों द्वारा कथित तौर पर भारत के बाहर व्यक्तिगत संपत्तियां खरीदने और RCom के मुनाफे को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए भी रकम का इस्तेमाल किए जाने की जांच की जा रही है।

ED ने कहा है कि मामले की आगे की जांच जारी है। हालांकि, लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।