मंडी, 20 अक्तूबर 2026 Fact Recorder
National Desk : महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे ‘सुक्खू सरकार’ के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इसी कड़ी में मंडी जिला के थुनाग क्षेत्र की ग्राम पंचायत उड़ीधार की आरती कुमारी स्वयं सहायता समूह के सहयोग से कैंटीन चलाकर अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही हैं।
आरती कुमारी सरस्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह के माध्यम से उन्हें थुनाग मिनी सचिवालय में कैंटीन चलाने का अवसर मिला। वर्ष 2024 से वह एक अन्य महिला के साथ मिलकर कैंटीन का संचालन कर रही हैं। इस पहल से दोनों महिलाओं को रोजगार मिला है और वे अपनी आजीविका अर्जित कर रही हैं।
आरती कुमारी के अनुसार, कैंटीन के माध्यम से उन्हें हर महीने लगभग 15 हजार रुपये की आय हो जाती है। इससे वह घर का खर्च चलाने के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई की जरूरतों को भी पूरा करने में सहयोग कर रही हैं। स्वरोजगार से जुड़ने के बाद उन्हें परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां निभाने में मदद मिली है और आत्मनिर्भर बनने की राह प्रशस्त हुई है।
आरती कुमारी ने बताया कि उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत दो लाख रुपये का ऋण मिला है, जिस पर 4 प्रतिशत ब्याज दर लागू है। इसके अतिरिक्त, स्वयं सहायता समूह को केंद्र सरकार की ओर से 15 हजार रुपये तथा प्रदेश सरकार की ओर से 25 हजार रुपये की स्टार्टअप राशि भी मिली है। इन आर्थिक सहयोगों से समूह की गतिविधियों को आगे बढ़ाने और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में सहायता मिल रही है।
आरती कुमारी ने महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार और विशेषतौर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। इससे वे अपनी आजीविका चलाने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी योगदान दे रही हैं।
मंडी जिला में 8,274 स्वयं सहायता समूह गठित
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि मंडी जिला के 14 विकास खंडों में कुल 8,274 स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं, जिनसे 63,968 महिलाएं जुड़ी हैं। जिला में 727 ग्राम संगठन तथा 48 क्लस्टर स्तरीय संघ भी कार्यरत हैं। इनमें से 7,744 स्वयं सहायता समूहों और 662 ग्राम संगठनों की मैपिंग की जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने तथा उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन समूहों के माध्यम से महिलाएं सामूहिक प्रयासों से आजीविका के नए साधन विकसित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं।









