October 28,2026 Fact Recorder
Chandigarh Desk: हरियाणा में नियमित होने की उम्मीद लगाए बैठे करीब 12 हजार अतिथि अध्यापकों को बड़ा झटका लगा है। प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने उनकी नियमितीकरण की मांग खारिज कर दी है। लंबे समय से नियमित शिक्षक का दर्जा पाने के लिए संघर्ष कर रहे अतिथि अध्यापकों के लिए यह फैसला निराशाजनक माना जा रहा है। अब इस मामले में सबकी निगाहें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पर टिकी हैं।
विभाग ने अपने स्पीकिंग ऑर्डर में कहा है कि अतिथि अध्यापकों की नियुक्तियां नियमित भर्ती की निर्धारित प्रक्रिया के तहत नहीं हुई थीं। ऐसे में उन्हें वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीतियों का लाभ नहीं दिया जा सकता। सरकार ने अपने फैसले के समर्थन में विभिन्न न्यायिक निर्णयों और संबंधित कानूनों का हवाला दिया है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जारी हुआ आदेश
यह आदेश सुखविंदर सिंह बनाम हरियाणा राज्य मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 25 मई 2026 को संबंधित याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद राज्य सरकार की अपील पर 6 अगस्त 2026 को खंडपीठ ने कहा कि दावे पर उपलब्ध तथ्यों और कानून के स्थापित सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लिया जाए। यदि नियमितीकरण का दावा नीति के तहत उचित पाया जाता है, तो उसका लाभ दिया जा सकता है। अन्यथा सरकार को उचित कारणों के साथ आदेश जारी करने की अनुमति थी।
नियुक्ति प्रक्रिया बनी नियमितीकरण में सबसे बड़ी बाधा
शिक्षा विभाग के अनुसार, वर्ष 2005 से अतिथि अध्यापकों को स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए प्रति पीरियड के आधार पर नियुक्त किया गया था। संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों, मुख्याध्यापकों और अधिकारियों ने स्थानीय जरूरतों के अनुसार उनकी सेवाएं ली थीं।
विभाग का तर्क है कि इन नियुक्तियों में नियमित भर्ती की तरह केंद्रीकृत चयन प्रक्रिया, परीक्षा आधारित मेरिट और आरक्षण संबंधी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर सरकार ने कहा कि इन नियुक्तियों को नियमित भर्ती के समान नहीं माना जा सकता।
2014 की नीतियों का लाभ देने से इनकार
सरकार ने 16 और 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि इनके तहत निर्धारित सेवा अवधि, शैक्षणिक योग्यता, स्वीकृत रिक्त पद और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है। विभाग के मुताबिक, इन शर्तों में छूट देने का प्रावधान नहीं है।
आदेश में सुप्रीम कोर्ट के उमा देवी फैसले सहित अन्य न्यायिक निर्णयों का भी उल्लेख किया गया है। सरकार का कहना है कि केवल लंबे समय तक सेवा करने से नियमितीकरण का अधिकार अपने आप नहीं मिल जाता।
2019 के कानून से सेवा सुरक्षा, नियमित पद का अधिकार नहीं
हरियाणा अतिथि अध्यापक सेवा अधिनियम, 2019 को भी सरकार ने अपने फैसले का आधार बनाया है। विभाग के अनुसार, इस कानून का उद्देश्य अतिथि अध्यापकों की सेवा निरंतरता और कार्यकाल को सुरक्षा देना है, न कि उन्हें स्वतः नियमित शिक्षक का दर्जा या नियमित वेतनमान प्रदान करना।
सरकार ने अनुभव के आधार पर नियमितीकरण से जुड़े जग्गो बनाम भारत संघ मामले को भी अतिथि अध्यापकों पर स्वतः लागू मानने से इनकार किया है।
आंदोलन पर पड़ सकता है फैसले का असर
नियमितीकरण की मांग खारिज होने से अतिथि अध्यापकों के आंदोलन पर असर पड़ने की आशंका है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुद्दे पर अध्यापकों के बीच आंदोलन की रणनीति को













