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SIR के बाद 5 राज्यों में 2.29 करोड़ मतदाताओं के नाम कम, यूपी में सबसे बड़ा असर; पंजाब में भी 14 लाख वोटर घटे

November 3,2026 Fact Recorder

National Desk:  देश के पांच चुनावी राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाताओं की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुल मतदाताओं की संख्या में करीब 2.29 करोड़ की कमी आई है। इन राज्यों में पहले लगभग 18.71 करोड़ मतदाता दर्ज थे, जबकि अंतिम सूची में यह संख्या घटकर करीब 16.43 करोड़ रह गई है।

इन पांचों राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव से पहले मतदाता सूची में हुए इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है, जहां कुल मतदाताओं की संख्या में करीब 2.04 करोड़ की कमी दर्ज की गई।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2.04 करोड़ मतदाता कम

SIR के बाद उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। पुनरीक्षण से पहले राज्य में करीब 15.44 करोड़ मतदाता थे। ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने पर यह संख्या घटकर 12.56 करोड़ रह गई थी।

इसके बाद दावों और आपत्तियों के निपटारे तथा नामों में सुधार की प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़कर करीब 13.40 करोड़ हो गई। इसके बावजूद राज्य में कुल मिलाकर लगभग 2.04 करोड़ मतदाताओं की कमी दर्ज की गई, जो शुरुआती संख्या का करीब 13.24 फीसदी है।

पंजाब में करीब 14 लाख मतदाताओं की कमी

पंजाब में भी SIR के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पुनरीक्षण से पहले राज्य में करीब 2.15 करोड़ मतदाता थे। ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर लगभग 1.94 करोड़ रह गई।

अंतिम मतदाता सूची में सुधार के बाद यह आंकड़ा बढ़कर करीब 2.01 करोड़ हो गया। इस तरह पंजाब में कुल मतदाताओं की संख्या में लगभग 14 लाख यानी 6.34 फीसदी की कमी दर्ज की गई।

ड्राफ्ट सूची से हटाए गए नामों में से करीब 7 लाख मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल किए गए। इससे पता चलता है कि पुनरीक्षण के दौरान दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए कई नाम वापस जोड़े गए।

उत्तराखंड में करीब 8 लाख वोटर कम

उत्तराखंड में SIR से पहले लगभग 80 लाख मतदाता दर्ज थे। ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर करीब 71 लाख रह गई। अंतिम सूची में सुधार के बाद मतदाताओं की संख्या लगभग 72 लाख हो गई।

इस तरह राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या में करीब 8 लाख यानी 10.07 फीसदी की कमी दर्ज की गई।

मणिपुर में 6.33 फीसदी की गिरावट

मणिपुर में भी मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या में कमी आई है। SIR से पहले राज्य में करीब 20.9 लाख मतदाता थे, जबकि ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर 19.3 लाख रह गई।

अंतिम सूची में सुधार के बाद मतदाताओं की संख्या लगभग 19.6 लाख हो गई। इस तरह राज्य में करीब 6.33 फीसदी मतदाताओं की कुल कमी दर्ज की गई।

गोवा में 1.3 लाख मतदाताओं के नाम कम

गोवा में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में लगभग 1.3 लाख की गिरावट आई है। पुनरीक्षण से पहले राज्य में करीब 11.85 लाख मतदाता थे। ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर 10.85 लाख रह गई, जबकि अंतिम सूची में यह आंकड़ा और कम होकर लगभग 10.58 लाख पहुंच गया।

इस तरह गोवा में मतदाताओं की संख्या में करीब 10.76 फीसदी की कमी दर्ज की गई।

17 राज्यों में SIR कराने का फैसला

चुनाव आयोग ने देश के 17 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया था। आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं को इसमें शामिल होने का अवसर देना है।

इस प्रक्रिया के तहत ऐसे युवाओं को भी मतदाता सूची में शामिल होने का मौका मिलेगा, जो निर्धारित पात्रता तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे। इसके अलावा जिन मतदाताओं के नाम सूची से छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

मार्च और मई 2027 में समाप्त होंगे विधानसभाओं के कार्यकाल

इन पांच राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा, उत्तराखंड की 70 सदस्यीय विधानसभा, मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा और गोवा की 40 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त होगा।

वहीं, उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को खत्म होगा। ऐसे में चुनाव आयोग के लिए समय रहते मतदाता सूची को अंतिम रूप देना महत्वपूर्ण होगा।

कुल मिलाकर, SIR के बाद पांचों राज्यों में मतदाताओं की संख्या में बड़ी कमी सामने आई है। हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि सभी संबंधित लोग अपात्र थे। वास्तविक स्थिति जानने के लिए नाम हटाने के कारणों, दावों-आपत्तियों और दोबारा नाम जोड़ने की प्रक्रिया को भी समझना जरूरी है।