October 26,2026 Fact Recorder
Lifestyle Desk: भारत के अलग-अलग शहर अपनी खास संस्कृति, खानपान और पारंपरिक उद्योगों के लिए मशहूर हैं। बिहार में भी एक ऐसा शहर है, जिसकी पहचान दुनिया भर में रेशम के कपड़ों और पारंपरिक बुनाई के कारण बनी है। इस शहर का नाम भागलपुर है, जिसे ‘सिल्क सिटी ऑफ इंडिया’ यानी भारत की सिल्क सिटी कहा जाता है। यहां की भागलपुरी सिल्क साड़ियां, स्टोल और दूसरे कपड़े अपनी खास बनावट और खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं।
भागलपुर को क्यों कहा जाता है सिल्क सिटी?
बिहार में गंगा नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित भागलपुर रेशम उत्पादन और बुनाई के लिए लंबे समय से प्रसिद्ध रहा है। यहां की अर्थव्यवस्था और स्थानीय संस्कृति में सिल्क उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है।
भागलपुर के कारीगर पीढ़ियों से रेशमी कपड़े तैयार करने की पारंपरिक कला को आगे बढ़ा रहे हैं। यहां साड़ियों, दुपट्टों, स्कार्फ, स्टोल और ड्रेस मटेरियल की बुनाई की जाती है। भागलपुरी सिल्क की खासियत इसकी बनावट, प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक डिजाइन में देखने को मिलती है।
क्या है भागलपुरी सिल्क की खासियत?
भागलपुर खास तौर पर टसर सिल्क के लिए जाना जाता है। इस रेशम की बनावट सामान्य शहतूत सिल्क से अलग होती है। टसर सिल्क के रेशे अपेक्षाकृत प्राकृतिक और हल्की खुरदुरी बनावट वाले होते हैं, जो कपड़े को एक खास रूप देते हैं।
इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं:
- खास बनावट: टसर सिल्क की प्राकृतिक बनावट इसे अलग पहचान देती है।
- आकर्षक रंग: इसके कपड़ों में सुनहरे, भूरे और मिट्टी जैसे प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल देखने को मिलता है।
- अनेक उपयोग: इससे साड़ियां, कुर्ते, स्टोल, स्कार्फ और सजावटी कपड़े बनाए जाते हैं।
- पारंपरिक बुनाई: स्थानीय कारीगरों की पीढ़ियों से चली आ रही कला इस उद्योग की महत्वपूर्ण पहचान है।
इन्हीं खूबियों के कारण भागलपुरी सिल्क की देश के अलग-अलग हिस्सों में मांग बनी हुई है।
सदियों पुरानी है सिल्क बुनाई की परंपरा
भागलपुर का रेशम उद्योग आधुनिक दौर की शुरुआत के साथ विकसित नहीं हुआ, बल्कि इसकी जड़ें पुरानी बुनाई परंपराओं में हैं। वर्ष 1810-11 में स्कॉटिश चिकित्सक फ्रांसिस बुकानन-हैमिल्टन ने अपने सर्वेक्षण के दौरान इस क्षेत्र के टसर सिल्क उद्योग का उल्लेख किया था।
समय के साथ भागलपुरी सिल्क ने स्थानीय बाजारों से आगे बढ़कर व्यापक पहचान बनाई। पारंपरिक कारीगरी और बदलते फैशन के मेल ने इस उद्योग को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रखने में मदद की है।
GI टैग से मिली क्षेत्रीय पहचान
भागलपुरी सिल्क की पहचान को मजबूत करने में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। GI टैग किसी उत्पाद की उस विशेष क्षेत्र से जुड़ी पहचान और प्रतिष्ठा को मान्यता देता है।
हालांकि, भागलपुरी सिल्क की विशिष्ट GI पंजीकरण स्थिति और संबंधित उत्पाद का आधिकारिक नाम प्रकाशित करने से पहले सरकारी GI रिकॉर्ड से सत्यापित करना उचित है।
आज भी कारीगर संभाल रहे हैं विरासत
बदलते बाजार, मशीनों से तैयार कपड़ों की प्रतिस्पर्धा और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भागलपुर के बुनकर अपनी पारंपरिक कला को आगे बढ़ा रहे हैं। यह उद्योग स्थानीय लोगों को रोजगार देने के साथ बिहार की हस्तशिल्प परंपरा को भी जीवित रखता है।
निष्कर्ष: भागलपुर केवल बिहार का एक ऐतिहासिक शहर नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध कपड़ा विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां की भागलपुरी सिल्क और टसर बुनाई इसे ‘सिल्क सिटी ऑफ इंडिया’ के रूप में खास पहचान दिलाती है।











