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सर्बिया में छात्रों के आंदोलन से सत्ता को बड़ा झटका! 14 साल से प्रभावशाली रहे पुतिन समर्थक अलेक्जेंडर वुचिच की हार

October 26,2026 Fact Recorder

International Desk:  सर्बिया की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन वाले गठबंधन ने चुनाव में बढ़त हासिल की है। खबर के मुताबिक, करीब 14 साल से सत्ता में प्रभाव रखने वाले राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच ने हार स्वीकार कर ली है। इस घटनाक्रम को देश में राजनीतिक बदलाव और युवा आंदोलन की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

छात्रों के आंदोलन ने कैसे बदली सर्बिया की राजनीति?

सर्बिया में छात्र पिछले दो साल से भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोपों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। इस आंदोलन ने धीरे-धीरे व्यापक जनसमर्थन हासिल किया और सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।

वुचिच की सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) का मुकाबला छात्र आंदोलन के समर्थन वाली स्टूडेंट्स लिस्ट से हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, छात्र समर्थित सूची को 135 सीटें मिलने का अनुमान था, जबकि वुचिच की पार्टी करीब 105 सीटों पर सिमटती दिखाई गई।

हालांकि, इन आंकड़ों को अंतिम आधिकारिक चुनाव परिणाम मानने से पहले संबंधित निर्वाचन प्राधिकरण की पुष्टि जरूरी है।

रेलवे स्टेशन हादसे के बाद तेज हुआ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन

सर्बिया में सरकार के खिलाफ असंतोष नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे के बाद और बढ़ गया था। स्टेशन की छतरी गिरने से 16 लोगों की मौत होने के बाद लोगों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, सरकारी जवाबदेही और कथित भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठाए।

छात्रों ने इस घटना को लेकर जवाबदेही तय करने और व्यवस्था में सुधार की मांग की। समय के साथ आंदोलन में युवाओं के अलावा किसानों, कलाकारों, विशेषज्ञों और दूसरे वर्गों का समर्थन भी जुड़ता गया।

बेलग्रेड समेत कई शहरों में समर्थकों ने मनाया जश्न

चुनावी नतीजों की खबर सामने आने के बाद राजधानी बेलग्रेड सहित कई शहरों में छात्र आंदोलन के समर्थकों ने जश्न मनाया। लोगों ने गाड़ियों के हॉर्न बजाए और सरकार के खिलाफ नारे लगाए।

वहीं, चुनाव के दौरान तनाव की स्थिति भी बनी रही। रिपोर्टों में चुनाव आयोग के मुख्यालय के आसपास पुलिस की तैनाती और कुछ स्थानों पर विरोधी समूहों की मौजूदगी का उल्लेख किया गया।

पुतिन से करीबी और यूरोपीय संघ की नजर

अलेक्जेंडर वुचिच को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीब माना जाता रहा है। वुचिच ने छात्र आंदोलन को विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप से जोड़ने की कोशिश की थी। चुनावी हार के बाद उन्होंने स्वतंत्र मीडिया और कुछ पश्चिमी देशों पर अपनी पार्टी के खिलाफ माहौल बनाने के आरोप लगाए।

दूसरी ओर, यूरोपीय संघ भी सर्बिया की राजनीतिक स्थिति पर नजर रखता रहा है, क्योंकि सर्बिया यूरोपीय संघ की सदस्यता का उम्मीदवार है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान मीडिया की स्वतंत्रता, निगरानी और संभावित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए गए।

क्या सर्बिया में शुरू होगा नया राजनीतिक दौर?

छात्र आंदोलन के समर्थन वाले गठबंधन की जीत की खबर सर्बिया की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत देती है। इस घटनाक्रम ने दिखाया है कि भ्रष्टाचार और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर युवाओं की लामबंदी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि, देश की आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि चुनाव परिणामों की आधिकारिक पुष्टि क्या होती है, नई सरकार कैसे बनती है और वह भ्रष्टाचार, लोकतांत्रिक सुधारों तथा आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए कौन से कदम उठाती है।