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हिमाचल में सेब कारोबार पर मौसम की मार: आधा रह गया व्यापार, प्रदेश को ₹1,000 करोड़ तक के नुकसान का अनुमान

October 12,2026 Fact Recorder

Himachal Desk: हिमाचल प्रदेश में इस बार खराब मौसम ने सेब कारोबार को बड़ा झटका दिया है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले बागवानी क्षेत्र में उत्पादन घटने से बागवानों की कमाई प्रभावित हुई है। पिछले साल जहां मंडियों में सेब की 2.65 करोड़ पेटियां पहुंची थीं, वहीं इस बार यह आंकड़ा घटकर करीब 1.5 करोड़ पेटियों तक रहने का अनुमान है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 800 से 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की आशंका है।

पिछले साल के मुकाबले आधा रह गया सेब कारोबार

हिमाचल प्रदेश के शिमला, कुल्लू, मंडी और किन्नौर जैसे जिलों में सेब हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। इस बार मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सेब की फसल प्रभावित हुई है। सेब सीजन अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और आगे बड़ी मात्रा में फसल मंडियों तक पहुंचने की संभावना कम बताई जा रही है।

कम उत्पादन का सीधा असर बागवानों की आमदनी पर पड़ा है। कई बागवानों के लिए कर्ज की किस्तें चुकाना भी मुश्किल हो रहा है।

1,000 करोड़ रुपये तक के नुकसान की आशंका

बागवानी विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस बार सेब कारोबार लगभग 2,500 करोड़ रुपये तक सिमट सकता है। आमतौर पर प्रदेश में सेब सीजन का कारोबार 3,000 से 3,500 करोड़ रुपये के बीच रहता है।

राज्य बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश शर्मा के अनुसार, यदि इस बार सेब की आवक डेढ़ करोड़ पेटियों तक सीमित रहती है, तो प्रदेश को 800 से 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन सीजन समाप्त होने के बाद ही किया जा सकेगा।

प्रदेश की अन्य बागवानी फसलों को भी शामिल किया जाए तो फलों का सालाना कारोबार करीब 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंचता है।

परिवहन, पैकिंग और स्थानीय बाजारों पर भी असर

सेब कारोबार में गिरावट का असर केवल बागवानों तक सीमित नहीं है। इससे परिवहन, पैकिंग, मजदूरी और स्थानीय व्यापार से जुड़े लोगों की आय भी प्रभावित हो रही है।

सेब की पेटियां कम मंडियों तक पहुंचने से ट्रकों की आवाजाही और पैकिंग से जुड़े काम में कमी आई है। वहीं, बागवानों की आमदनी घटने से कपड़े, कृषि उपकरण, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं की खरीद पर भी असर पड़ सकता है।

अर्थशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राकेश शर्मा के अनुसार, कारोबार घटने से विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और आय प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर राज्य के राजस्व पर भी पड़ने की आशंका है।

क्यों खराब हुई सेब की फसल?

इस बार मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों ने सेब उत्पादन को प्रभावित किया है। सर्दियों में पर्याप्त बर्फबारी नहीं हुई। इसके बाद पेड़ों पर फूल आने के समय मौसम अनुकूल नहीं रहा, जिससे परागण प्रभावित हुआ। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि ने भी फसल को नुकसान पहुंचाया।

इसके अलावा, नई पौध अभी पूरी तरह उत्पादन की स्थिति में नहीं पहुंची है। मौसम में बदलाव और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव भी इस सीजन की चुनौतियों में शामिल बताए जा रहे हैं।

बागवानों के सामने बढ़ीं आर्थिक चुनौतियां

सेब की फसल हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को गति देती है। इससे होने वाली आमदनी से बागवान घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ खेती में निवेश और अन्य खरीदारी भी करते हैं। उत्पादन कम होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा है।

अब सभी की नजरें सीजन के अंतिम आंकड़ों पर हैं। इसके बाद ही नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।