September 19,2026 Fact Recorder
Business Desk: आज की युवा पीढ़ी रिटायरमेंट के लिए पहले की तुलना में जल्दी योजना बनाना शुरू कर रही है। लेकिन एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है—लोग जल्दी काम से छुट्टी लेना चाहते हैं, जबकि पर्याप्त रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार करने को लेकर उनका भरोसा काफी कम है।
Axis Max Life की IRIS 6.0 रिपोर्ट के मुताबिक, 70% शहरी भारतीय तय उम्र से पहले रिटायर होना चाहते हैं, बशर्ते उनकी आर्थिक जरूरतें पूरी हो जाएं। इनमें करीब आधे लोग 50 साल की उम्र से पहले FIRE (Financial Independence, Retire Early) हासिल करना चाहते हैं।
62% Gen-Z ने शुरू किया रिटायरमेंट के लिए निवेश
रिपोर्ट के अनुसार, Gen-Z औसतन 29 साल की उम्र से रिटायरमेंट के बारे में सोचना शुरू कर रही है। वहीं मिलेनियल्स के लिए यह उम्र 31 साल और Gen X+ के लिए 34 साल है।
निवेश की बात करें तो 62% Gen-Z रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू कर चुकी है। मिलेनियल्स में यह आंकड़ा 70% और Gen X+ में 75% है। इससे पता चलता है कि युवा पीढ़ी रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर जागरूक हो रही है, हालांकि निवेश शुरू करने के मामले में वह बड़ी पीढ़ियों से अभी पीछे है।
61% को पता है कितना पैसा चाहिए, लेकिन…
रिटायरमेंट के बाद अपनी मौजूदा लाइफस्टाइल बनाए रखने के लिए कितने पैसे की जरूरत होगी, इसका अनुमान 61% लोगों को है। लेकिन सिर्फ 11% लोगों को भरोसा है कि उनका मौजूदा रिटायरमेंट फंड पूरी जिंदगी चल पाएगा।
वहीं, 39% लोगों को आशंका है कि उनका रिटायरमेंट फंड नौकरी छोड़ने के बाद पांच साल भी नहीं चल पाएगा। इससे रिटायरमेंट प्लानिंग में सिर्फ लक्ष्य तय करने के बजाय पर्याप्त और नियमित निवेश की जरूरत सामने आती है।
क्या 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस अब कम पड़ रहा है?
रिपोर्ट में रिटायरमेंट कॉर्पस को लेकर लोगों की बदलती सोच भी सामने आई है। साल 2025 में 77% लोग मानते थे कि रिटायरमेंट के लिए 1 करोड़ रुपये या उससे कम पर्याप्त हो सकते हैं। 2026 में यह आंकड़ा घटकर 70% रह गया।
यानी अब ज्यादा लोग मान रहे हैं कि महंगाई, बढ़ते खर्च और लंबी रिटायरमेंट अवधि को देखते हुए 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम की जरूरत पड़ सकती है।
15 लाख रुपये से अधिक सालाना आय वाले परिवारों में केवल 51% लोग 1 करोड़ रुपये या उससे कम रकम को पर्याप्त मानते हैं। मेट्रो शहरों में यह आंकड़ा 63% है।
पुरानी पीढ़ी को जल्दी शुरुआत न करने का अफसोस
रिपोर्ट के मुताबिक, Gen X+ के 91% लोगों को लगता है कि उन्हें रिटायरमेंट के लिए निवेश पहले शुरू कर देना चाहिए था। वहीं, 82% लोगों का मानना है कि स्थिर आय बनाए रखने के लिए उन्हें रिटायरमेंट के बाद भी काम करना पड़ सकता है।
Axis Max Life के MD और CEO सुमित मदान के अनुसार, रिटायरमेंट का मतलब केवल नौकरी छोड़ना नहीं है, बल्कि ऐसी आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करना है जिसमें आगे काम करना मजबूरी के बजाय व्यक्ति की पसंद हो।
रिटायरमेंट प्लानिंग में हेल्थ भी अहम
रिटायरमेंट की तैयारी सिर्फ आर्थिक योजना तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, 75% लोगों को उम्मीद है कि रिटायरमेंट के बाद वे स्वस्थ और फिट रहेंगे, जबकि 52% लोगों के पास हेल्थ इंश्योरेंस है।
नियमित शारीरिक गतिविधि को लेकर भी लोग जागरूक दिखाई देते हैं। 44% लोग रोजाना एक्सरसाइज या किसी अन्य फिजिकल एक्टिविटी में शामिल होते हैं, जबकि 21% लोग वेयरेबल डिवाइस के जरिए अपनी हेल्थ ट्रैक करते हैं।
परिवार से जुड़ी उम्मीदें भी बनी हुई हैं
रिटायरमेंट के बाद परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। 87% लोगों को उम्मीद है कि वे रिटायरमेंट के बाद अपने बच्चों के साथ रहेंगे। हालांकि, परिवार और समाज से मिलने वाले सहयोग को लेकर भरोसा 87% से घटकर 84% रह गया है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह संकेत देती है कि शहरी भारतीयों में रिटायरमेंट की तैयारी को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। खासकर Gen-Z कम उम्र में योजना और निवेश शुरू कर रही है, लेकिन जल्दी रिटायरमेंट के लक्ष्य और पर्याप्त कॉर्पस तैयार करने के बीच अभी बड़ा अंतर बना हुआ है।













