September 02,2026 Fact Recorder
International Desk: अमेरिका में नौकरी कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए ग्रीन कार्ड हासिल करना अब बेहद लंबी प्रक्रिया बन गया है। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) की रिपोर्ट के मुताबिक, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की EB-2 कैटेगरी में नए भारतीय आवेदकों को संभावित तौर पर 179 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, चीन के नागरिकों के लिए इसी श्रेणी में अनुमानित वेटिंग करीब 25 साल है।
करीब 10 लाख भारतीय ग्रीन कार्ड की कतार में
NFAP ने अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लंबित मामलों का आकलन किया है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 10 लाख भारतीय रोजगार आधारित इमिग्रेशन बैकलॉग में फंसे हुए हैं।
अमेरिकी कानून के तहत हर साल रोजगार के आधार पर लगभग 1.40 लाख ग्रीन कार्ड जारी किए जा सकते हैं। इसके अलावा, किसी एक देश के नागरिकों को कुल रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का 7 प्रतिशत से अधिक देने पर भी सीमा लागू है। बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवरों के आवेदन के कारण यह व्यवस्था भारतीय आवेदकों के लिए लंबी कतार में बदल गई है।
EB-2 में सबसे ज्यादा परेशानी
रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय आवेदकों के लिए सबसे गंभीर स्थिति EB-2 श्रेणी में है। जनवरी 2026 या उसके बाद आवेदन करने वाले भारतीयों के लिए मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर संभावित वेटिंग पीरियड 179 साल तक आंका गया है।
वहीं, EB-3 कैटेगरी में करीब 38 साल और EB-1 में लगभग 4 से 5 साल का संभावित इंतजार बताया गया है।
हालांकि, ये आंकड़े मौजूदा बैकलॉग, उपलब्ध ग्रीन कार्ड और इमिग्रेशन नियमों के आधार पर किए गए अनुमान हैं। भविष्य में कानून, आवेदनों की संख्या या ग्रीन कार्ड उपलब्धता में बदलाव होने पर वास्तविक प्रतीक्षा अवधि अलग हो सकती है।
ग्रीन कार्ड बैकलॉग 12.6 लाख तक पहुंचा
NFAP के विश्लेषण के अनुसार, रोजगार आधारित EB-1, EB-2 और EB-3 श्रेणियों का कुल बैकलॉग दिसंबर 2025 तक करीब 12.6 लाख पहुंच गया था। अप्रैल 2020 में यह आंकड़ा लगभग 10.5 लाख था।
यानी करीब पांच साल की अवधि में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड का लंबित स्टॉक लगभग 20.6 प्रतिशत बढ़ गया। भारतीय पेशेवर इस बढ़ते बैकलॉग से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले समूहों में शामिल हैं।
भारतीयों और चीन के नागरिकों के बीच कितना अंतर?
NFAP की रिपोर्ट भारतीय और चीनी आवेदकों के बीच ग्रीन कार्ड वेटिंग में बड़ा अंतर दिखाती है।
- EB-2: भारतीयों के लिए करीब 179 साल, चीन के लिए करीब 25 साल
- EB-3: भारतीयों के लिए करीब 38 साल, चीन के लिए करीब 7 साल
- EB-1: भारतीयों के लिए करीब 4-5 साल
इस अंतर की एक बड़ी वजह भारतीय नागरिकों की ओर से रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आने वाले आवेदनों की बड़ी संख्या और प्रति देश लागू वार्षिक सीमा बताई गई है।
क्या है EB-1, EB-2 और EB-3?
EB-1
इस श्रेणी में असाधारण क्षमता वाले लोग, प्रमुख शोधकर्ता और शिक्षक तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कुछ वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।
EB-2
इसमें उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले पेशेवर और विशेष योग्यता वाले कर्मचारी शामिल होते हैं। भारतीय हाई-स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए यही कैटेगरी मौजूदा समय में सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
EB-3
इस श्रेणी में स्नातक डिग्री वाले पेशेवरों के साथ-साथ कुशल और कुछ अन्य श्रेणी के कर्मचारी भी शामिल होते हैं।
क्यों बढ़ रहा है भारतीयों का ग्रीन कार्ड बैकलॉग?
अमेरिका में भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और दूसरे हाई-स्किल्ड कर्मचारियों की बड़ी संख्या रोजगार आधारित इमिग्रेशन के लिए आवेदन करती है। दूसरी ओर, ग्रीन कार्ड की वार्षिक संख्या सीमित है और प्रति देश तय सीमा भी लागू होती है।
नतीजा यह है कि भारतीय आवेदकों की संख्या और उपलब्ध ग्रीन कार्ड के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। यही अंतर समय के साथ बढ़ते बैकलॉग और लंबी वेटिंग का प्रमुख कारण बन रहा है।











