August 27,2026 Fact Recorder
International Desk: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। भूकंप के कुछ ही मिनट बाद अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। सड़कें और पुल बह गए, घर व वाहन क्षतिग्रस्त हुए और कई क्षेत्रों का संपर्क पूरी तरह टूट गया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत की खबर है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया और महज तीन मिनट बाद बाढ़ की सूचना मिली। शुरुआती आकलन में आशंका है कि भूकंप के झटकों के कारण ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट या ग्लेशियर टूटने की घटना हुई, जिसके बाद भारी मात्रा में पानी तेजी से नीचे की ओर आया।
2,000 फीट चौड़ा ग्लेशियर टूटने से आया सैलाब
सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन के आधार पर विशेषज्ञों ने बताया कि करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर ग्लेशियर का लगभग 2,000 फीट चौड़ा हिस्सा टूटकर करीब 4,000 फीट नीचे गिरा। इसके बाद ल्हेंडे खोला नदी में अचानक तेज बहाव आया, जो आगे भोटेकोशी नदी तक पहुंच गया। इस प्रचंड सैलाब ने निचले इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया।
100 मीटर ऊंची पानी की दीवार ने मचाई तबाही
रसुवा के तिमुरे बाजार में बाढ़ का मंजर बेहद भयावह था। स्थानीय अधिकारी के मुताबिक, उन्होंने ऊपर से धुएं जैसे गुबार के साथ पानी की एक विशाल दीवार को तेजी से नीचे आते देखा। बताया गया कि पानी करीब 100 मीटर ऊंची लहर की तरह बाजार में दाखिल हुआ और कुछ ही समय में पूरा इलाका तबाह हो गया।
22 कंक्रीट पुल और 42 किलोमीटर सड़क बही
रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग समेत कई जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 22 कंक्रीट पुल और पांच बेली पुल बह गए, जबकि करीब 42 किलोमीटर सड़क भी सैलाब में बह गई। कई पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने से बिजली व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। बाढ़ का पानी नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी ईस्ट तक फैल गया।
नेपाल सरकार ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग को तीन महीने के लिए आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है। प्रभावित लोगों तक इलाज और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने के लिए राहत एवं बचाव कार्य तेज किए जा रहे हैं।
नेपाल में कई भारतीय भी फंसे
नेपाल की इस त्रासदी के बीच भारत के कई राज्यों के नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। पश्चिम बंगाल से कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बाढ़ आने के बाद संपर्क से बाहर है। दल में 30 यात्री और दो टूर मैनेजर शामिल हैं। आखिरी बार उनसे सुबह करीब 8 बजे संपर्क हुआ था।
केरल के कन्नूर जिले के 37 पर्यटक भी नेपाल में फंसे हैं। हालांकि, उनके सुरक्षित होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ के कारण वे आगे की यात्रा नहीं कर पा रहे हैं और नेपाल से वापस भी नहीं लौट सके हैं।
कई राज्यों ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
फंसे भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए कई राज्यों ने हेल्पलाइन शुरू की हैं। पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, राजस्थान, ओडिशा और सिक्किम की सरकारों ने अलग-अलग सहायता नंबर जारी किए हैं।
भारत के नेपाल स्थित दूतावास ने भी प्रभावित भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, जिन पर कॉल और व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क किया जा सकता है।
पहाड़ी इलाकों की यात्रा को लेकर सावधानी की अपील
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि जुलाई-अगस्त के दौरान भारी बारिश, भूस्खलन, अचानक बाढ़ और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यात्रियों को मौसम और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों को ध्यान में रखकर ही यात्रा करनी चाहिए।













