August 25,2026 Fact Recorder
Education Desk: सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त स्वीकृत पदों पर शिक्षकों को मानदेय के आधार पर नियुक्त करने की राज्य सरकार की नीति को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी स्वीकृत पद पर अस्थायी रूप से शिक्षक की नियुक्ति की जाती है, तो उसे संबंधित पद के न्यूनतम पे-स्केल और अनुमन्य भत्तों का लाभ दिया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने मनोज कुमार सिंह समेत करीब 190 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने राज्य सरकार के 9 नवंबर 2023 और 8 जुलाई 2024 के शासनादेशों को निरस्त कर दिया और कानून के अनुरूप नई व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया।
पहले तदर्थ शिक्षकों को हटाया, फिर मानदेय पर नियुक्ति क्यों?
हाईकोर्ट ने सरकार के दोनों शासनादेशों के बीच विरोधाभास पर भी सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि सरकार ने पहले तदर्थ शिक्षकों को हटाने की व्यवस्था की और बाद में उन्हीं स्कूलों में शिक्षकों की कमी का हवाला देते हुए मानदेय पर नियुक्ति की नीति लागू कर दी।
कोर्ट ने इस व्यवस्था को ‘अपरोबेट एंड रीप्रोबेट’ के सिद्धांत के विपरीत माना। अदालत के मुताबिक सरकार एक ओर किसी व्यवस्था को समाप्त नहीं कर सकती और दूसरी ओर उसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए एक अलग व्यवस्था लागू नहीं कर सकती।
25 और 30 हजार रुपये के मानदेय पर भी सवाल
राज्य सरकार की नीति के तहत हाईस्कूल स्तर पर शिक्षकों को 25 हजार रुपये और इंटरमीडिएट स्तर पर 30 हजार रुपये प्रति माह मानदेय देने का प्रावधान था।
हाईकोर्ट ने इन रकम की तुलना संबंधित स्वीकृत पदों के वेतनमान से करते हुए इस व्यवस्था पर सवाल उठाया। हाईस्कूल शिक्षक के स्वीकृत पद का पे-स्केल ₹44,900 से ₹1,42,400 और इंटरमीडिएट शिक्षक का पे-स्केल ₹47,600 से ₹1,51,100 बताया गया है।
अदालत ने कहा कि जब कोई शिक्षक स्वीकृत पद पर कार्य कर रहा है, तो उसे उस पद के निर्धारित न्यूनतम पे-स्केल से काफी कम मानदेय देना उचित नहीं माना जा सकता।
अब क्या होगा?
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दोनों निरस्त शासनादेशों के स्थान पर कानून के अनुरूप नई व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने साफ किया कि स्वीकृत पद पर अस्थायी रूप से नियुक्त शिक्षक को संबंधित पद का न्यूनतम पे-स्केल और अनुमन्य भत्ते दिए जाने चाहिए। इस फैसले से सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में मानदेय पर काम कर रहे या नियुक्ति की प्रक्रिया से जुड़े शिक्षकों पर सीधा असर पड़ सकता है।













