August 24,2026 Fact Recorder
Himachal Desk: हिमाचल प्रदेश में करीब छह साल पुराने हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। गर्भवती प्रेमिका की हत्या कर शव को ठिकाने लगाने के मामले में अदालत ने आरोपी प्रेमी अभिषेक शर्मा को दोषी करार देते हुए उम्रकैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
मामला वर्ष 2020 का है। अभियोजन के अनुसार आरोपी अभिषेक शर्मा ने अपनी प्रेमिका को कथित तौर पर जहरीला पदार्थ दिया और उसकी मौत के बाद शव को खड्ड के किनारे दफना दिया। मृतका गर्भवती थी और घटना के बाद उसके लापता होने से परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।
मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों से खुला राज
पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी घटना से पहले अपनी प्रेमिका से लगातार संपर्क में था। पुलिस को आरोपी के मोबाइल की जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्य भी मिले। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने गूगल और यूट्यूब पर गर्भपात तथा हत्या से संबंधित जानकारी तलाश की थी।
पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए आरोपी से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध कबूल किया। उसकी निशानदेही पर खड्ड से युवती का कंकाल बरामद किया गया।
फॉरेंसिक जांच में हुई श*व की पुष्टि
बरामद कंकाल और दांतों से प्राप्त डीएनए नमूनों की फॉरेंसिक जांच कराई गई। डीएनए रिपोर्ट से मृतका की पहचान की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों के साथ अन्य महत्वपूर्ण सबूत पेश किए। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अभिषेक शर्मा को हत्या का दोषी माना।
ह*त्या के साथ साक्ष्य मिटाने का भी दोष
अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या के मामले में उम्रकैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 201 के तहत साक्ष्य मिटाने के अपराध में 2 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।
यह मामला लंबे समय तक पुलिस के लिए चुनौती बना रहा, लेकिन मोबाइल डेटा, डिजिटल साक्ष्य, फॉरेंसिक जांच और आरोपी की निशानदेही से पुलिस हत्या की गुत्थी सुलझाने में सफल रही।












