August 21,2026 Fact Recorder
Bollywood Desk: करण जौहर के माइंड गेम रियलिटी शो ‘द ट्रेटर्स’ सीजन 2 में इस बार गद्दारों को पहचानने से ज्यादा चर्चा खिलाड़ियों की रणनीति, आपसी टकराव और बदलते समीकरणों की हो रही है। पहले सीजन में जहां कंटेस्टेंट्स का मुख्य लक्ष्य गद्दारों को ढूंढना था, वहीं दूसरे सीजन में खेल के साथ-साथ इमेज, स्क्रीन स्पेस और ईगो भी अहम भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं।
गद्दारों से ज्यादा स्क्रीन स्पेस पर नजर?
‘द ट्रेटर्स 2’ में कई खिलाड़ियों का गेम पहले सीजन के मुकाबले काफी अलग दिखाई दे रहा है। कंटेस्टेंट्स पिछले सीजन को देखकर पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे हैं, लेकिन कई बार यही ओवर-प्लानिंग उनके फैसलों पर भारी पड़ती नजर आती है। मजबूत खिलाड़ियों को गद्दार होने के पुख्ता सबूतों के बजाय संभावित कॉम्पिटिटर मानकर निशाना बनाने की रणनीति भी देखने को मिल रही है।
मुनव्वर फारूकी जैसे मजबूत खिलाड़ी को लेकर हुए फैसलों ने भी शो में रणनीति और प्रतिस्पर्धा के बीच के अंतर को उजागर किया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या खिलाड़ी वास्तव में गद्दारों को पकड़ने पर ध्यान दे रहे हैं या फिर मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को रास्ते से हटाना उनकी प्राथमिकता बन गया है?
ईगो और क्रेडिट वॉर ने बदला गेम
सीजन 2 में खिलाड़ियों के बीच क्रेडिट को लेकर खींचतान भी देखने को मिल रही है। पारुल गुलाटी द्वारा क्रिस्टल डिसूजा पर लगाए गए ट्रेटर के आरोप के बाद महल के अंदर समीकरण तेजी से बदलते नजर आए। कई खिलाड़ियों को पारुल का अंदाजा सही लगने की उम्मीद थी, लेकिन इसके बावजूद उनका साथ देने के बजाय उनके खिलाफ माहौल बनता दिखाई दिया।
ऐसे फैसलों ने गेम को और ज्यादा पेचीदा बना दिया है। किसी एक खिलाड़ी को लगातार सही साबित होने से रोकने की कोशिश में इनोसेंट्स के फैसले कई बार उलटे पड़ते नजर आते हैं।
मल्लिका शेरावत ने बढ़ाया एंटरटेनमेंट का तड़का
इस सीजन में मल्लिका शेरावत का अंदाज भी दर्शकों का ध्यान खींच रहा है। वह कई बार अपनी बेबाक बातचीत, गॉसिप और मजाकिया अंदाज से माहौल को हल्का करती नजर आती हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनकी कुछ टिप्पणियां और ऑब्जर्वेशन बाद में सही साबित होती दिखाई देती हैं।
वहीं शालिनी पासी अपने अलग अंदाज, लग्जरी लाइफस्टाइल और अनोखे रिएक्शंस के कारण शो में एक अलग रंग जोड़ रही हैं। इनके अलावा श्वेता जैसी कंटेस्टेंट्स की रणनीतिक सोच भी खेल को नया मोड़ दे रही है।
राउंड टेबल पर हर बार बदल जाता है खेल
‘द ट्रेटर्स 2’ की सबसे बड़ी खासियत इस बार इसकी अनिश्चितता बन गई है। दिनभर खिलाड़ी किसी एक कंटेस्टेंट को ट्रेटर मानकर रणनीति बनाते हैं, लेकिन राउंड टेबल तक पहुंचते-पहुंचते समीकरण बदल जाते हैं।
वोटिंग के दौरान शक, बहस और आपसी रणनीति के चलते अक्सर वही खिलाड़ी निशाने पर आ जाता है, जिसका नाम पूरे दिन चर्चा में भी नहीं रहा होता। यही वजह है कि दर्शकों के लिए भी यह अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है कि अगला एलिमिनेशन किसका होगा।
पहले सीजन से कितना बदला ‘द ट्रेटर्स’?
पहले सीजन में गेम अपेक्षाकृत सीधा नजर आता था—इनोसेंट खिलाड़ियों को ट्रेटर्स की पहचान करनी थी और उन्हें बाहर करना था। लेकिन दूसरे सीजन में रणनीति कहीं ज्यादा जटिल हो गई है। अब गद्दारों की तलाश के साथ-साथ गठजोड़, ईगो, पर्सनल समीकरण और स्क्रीन प्रेजेंस भी खेल को प्रभावित करते नजर आ रहे हैं।
यही बदलाव शो को पहले से ज्यादा अनप्रेडिक्टेबल बना रहा है। हालांकि इससे गेम की शुरुआती मासूमियत कुछ कम हुई है, लेकिन ड्रामा, गॉसिप और लगातार बदलते समीकरणों ने दर्शकों के लिए मनोरंजन का स्तर जरूर बढ़ा दिया है।
कुल मिलाकर, ‘द ट्रेटर्स 2’ अब सिर्फ गद्दारों को खोजने का गेम नहीं रह गया है। यह रणनीति, भरोसे, ईगो और इमेज के बीच चल रही ऐसी जंग बन चुका है, जिसमें अगला कदम कौन उठाएगा और कौन बाहर होगा, इसका अंदाजा लगाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।













