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PM मोदी ने रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का किया विमोचन, बोले- देश को कोविंद जी जैसे युवाओं की जरूरत

August 12,2026 Fact Recorder

National Desk:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ का विमोचन किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कोविंद के जीवन, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह आत्मकथा लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर साबित होगी और देश की युवा पीढ़ी को उनके अनुभवों से सीखना चाहिए।

‘हमें भविष्य में कोविंद जी जैसे अनेकों युवा चाहिए’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रामनाथ कोविंद जैसे व्यक्तित्वों ने अपनी मेहनत और क्षमता के बल पर न सिर्फ अपने जीवन को बदला, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उन्होंने कहा कि देश को ऐसे युवाओं की जरूरत है जो मुश्किल परिस्थितियों से घबराएं नहीं और चुनौतियों के सामने हार न मानें। मेहनत और दृढ़ संकल्प के जरिए आगे बढ़ने का हौसला ही मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण का रास्ता तैयार करेगा।

राष्ट्रपति पद के बाद भी सक्रिय हैं कोविंद

पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी रामनाथ कोविंद ने खुद को आराम तक सीमित नहीं किया। वह अभी भी ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, कोविंद की कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव देश के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने आत्मकथा के लिए पूर्व राष्ट्रपति को बधाई भी दी।

मुश्किलों ने कोविंद को बनाया मजबूत

प्रधानमंत्री ने रामनाथ कोविंद के बचपन के संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका जन्म कानपुर देहात के एक सामान्य परिवार में हुआ था। उनके जीवन में बचपन से ही कई कठिन परिस्थितियां आईं।

पीएम मोदी ने किताब में बताए गए उस प्रसंग का उल्लेख किया, जब गर्मी के दिनों में उनके घर में आग लग गई थी और उनकी मां घर का सामान बचाने की कोशिश करते हुए आग की चपेट में आ गई थीं। इस हादसे में उनकी मां की मौत हो गई थी।

मोदी ने कहा कि इतनी कम उम्र में मां को खोना बेहद दर्दनाक अनुभव था, लेकिन इन कठिन परिस्थितियों ने रामनाथ कोविंद को तोड़ने के बजाय और मजबूत बनाया।

गांव से राष्ट्रपति भवन तक का सफर

रामनाथ कोविंद की आत्मकथा में उनके गांव से लेकर राष्ट्रपति भवन तक के सफर, व्यक्तिगत संघर्षों, अनुभवों और सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख किया गया है।

पीएम मोदी ने युवाओं से अपील की कि वे कोविंद के जीवन और उनके अनुभवों को पढ़ें। उन्होंने कहा कि आत्मकथा आने वाली पीढ़ियों को कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने, मेहनत करने और देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा दे सकती है।