August 12, 2026 Fact Recorder
Himachal Desk: हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून ने भारी तबाही मचाई है। 30 जून से 9 अगस्त के बीच भारी बारिश, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के चलते राज्य में कम से कम 157 लोगों की मौ*त हुई है, जबकि 257 लोग घायल हुए हैं। इस दौरान करीब 900 संपत्तियों और सार्वजनिक निर्माण कार्यों को नुकसान पहुंचा है और नुकसान का आंकड़ा 886 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
राज्य में हुई कुल मौ*तों में 89 लोगों की जान सड़क हादसों में गई, जबकि 68 लोगों की मौ*त भूस्खलन, डूबने, सांप के काटने या ऊंचाई से गिरने जैसी घटनाओं में हुई। सबसे ज्यादा 24 मौ*तें चंबा में दर्ज की गई हैं। इसके बाद कुल्लू और कांगड़ा में 21-21, जबकि शिमला में 20 लोगों की मौ*त हुई। स्पीति और लाहौल में भी 18-18 मौ*तें दर्ज की गई हैं।
पांच जिलों में ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश का खतरा देखते हुए पांच जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित है और कई इलाकों में सड़क, बिजली और पानी की सेवाएं बाधित हुई हैं।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) की रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश और भूस्खलन के कारण 259 सड़कें बंद हैं। इनमें मंडी की 120, चंबा की 42, कुल्लू की 40 और शिमला की 30 सड़कें शामिल हैं।
बिजली और पानी की सप्लाई भी प्रभावित
बारिश और भूस्खलन का असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ा है। मंडी में 63 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर रीजन (DTR) प्रभावित हुए हैं, जबकि अन्य जिलों में भी बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति भी बाधित हुई है।
शिमला में लगातार बारिश, सड़क टूटने और पानी की सप्लाई प्रभावित होने से जुड़ी 12 घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा हमीरपुर में 5 और बिलासपुर में 2 स्थानों पर पानी की सप्लाई बाधित हुई।
क्या जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियां जिम्मेदार?
हिमाचल में हर साल मानसून के दौरान बढ़ती आपदाओं को लेकर जलवायु परिवर्तन और अनियोजित निर्माण पर सवाल उठ रहे हैं। केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में अत्यधिक बारिश की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है। साथ ही, मानवीय गतिविधियां और अवैज्ञानिक निर्माण भी आपदा के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
लगातार बढ़ती बारिश, भूस्खलन और बुनियादी ढांचे को हो रहे नुकसान ने हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में आपदा प्रबंधन और सुरक्षित निर्माण की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है।













