August 10,2026 Fact Recorder
National Desk: उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के बीच कुछ रूटों पर तेंदुओं का खतरा वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। बिजनौर और आसपास के इलाकों में तेंदुओं की संख्या करीब 500 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा के लिए वन कर्मियों को लगातार निगरानी करनी पड़ रही है।
बिजनौर और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से मानव-तेंदुआ संघर्ष गंभीर समस्या बना हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2023 से अब तक तेंदुओं के हमलों में 33 लोगों की मौत हुई है, जबकि 58 लोग घायल हुए हैं। कांवड़ यात्रा को देखते हुए वन विभाग के कर्मचारियों को संवेदनशील इलाकों और यात्रा मार्गों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
24 घंटे निगरानी आसान नहीं
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, उपलब्ध कर्मचारियों की संख्या को देखते हुए इतने बड़े इलाके में चौबीसों घंटे निगरानी रखना आसान नहीं है। अधिकारियों के अनुसार तेंदुओं की संख्या में हर साल करीब 50 से 60 तक बढ़ोतरी हो रही है, जिससे चुनौती लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों और वन अधिकारियों के स्तर पर तेंदुओं की आबादी को नियंत्रित करने के लिए बंध्याकरण जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र में इस दिशा में अनुमति मिल चुकी है, जबकि उत्तर प्रदेश में इस प्रस्ताव पर अभी अध्ययन किया जा रहा है।
तेंदुओं को पकड़ने के बाद भी समस्या
वन विभाग के सामने सिर्फ तेंदुओं को पकड़ने की चुनौती नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ना भी बड़ी समस्या बन गया है। स्थानीय लोगों की मांग पर तेंदुए पकड़े जाते हैं, लेकिन इसके बाद उन्हें कहां छोड़ा जाए, इस पर वन विभाग को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
पहले कुछ तेंदुओं को ललितपुर, चित्रकूट या उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड सीमा से लगे जंगलों में छोड़ा जाता था। कुछ मामलों में उन्हें चिड़ियाघरों में भी भेजा जाता था। हालांकि अब चिड़ियाघरों में भी पर्याप्त जगह की समस्या बताई जा रही है। दूसरी ओर, जंगलों में छोड़े गए तेंदुओं से वहां रहने वाले लोगों के बीच भी डर पैदा होने की आशंका रहती है।
पीलीभीत में लेपर्ड सफारी पर विचार
वन बल प्रमुख सुनील चौधरी के मुताबिक, वन्यजीव विंग से जुड़े अधिकारी तेंदुओं के बंध्याकरण के प्रस्ताव का अध्ययन कर रहे हैं। इसके अलावा पीलीभीत में लेपर्ड सफारी परियोजना पर भी विचार किया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन उपायों से भविष्य में समस्या का स्थायी समाधान खोजने में मदद मिल सकती है।
बिजनौर में तेंदुए के हमलों में घायल
- 2023: 14
- 2024: 16
- 2025: 21
- 2026: 7
- कुल: 58
तेंदुए के हमलों में मौतें
- 2023: 17
- 2024: 8
- 2025: 6
- 2026: 2
- कुल: 33
कांवड़ यात्रा के दौरान वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी बनाए रखना है, ताकि तेंदुए और श्रद्धालुओं के बीच किसी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।













