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Success Story: सरकारी स्कूल की 14 साल की छात्रा ने अंतरिक्ष मिशन में बनाई जगह, 12 हजार आवेदकों में हुआ चयन

August 10, 2026 Fact Recorder
Education Desk: आंध्र प्रदेश की 14 वर्षीय कंडुला जेसी ने अपनी मेहनत, जिज्ञासा और विज्ञान के प्रति जुनून के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। धवलेश्वरम के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली जेसी का चयन दुनिया के पहले अंतरराष्ट्रीय ऑल-गर्ल्स लूनर क्यूबसैट मिशन ‘शक्तिसैट’ के लिए हुआ है। वह इस मिशन के लिए चुनी गई 20 भारतीय छात्राओं में शामिल हैं और आंध्र प्रदेश से चयनित होने वाली एकमात्र छात्रा हैं।
12 हजार आवेदकों के बीच मिली जगह

कंडुला जेसी का चयन करीब 12,000 आवेदकों और 108 देशों की प्रतिभागियों के बीच हुआ है। मिशन के तहत छात्राओं की टीम द्वारा तैयार किए गए लूनर क्यूबसैट को 11 अक्तूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किए जाने की योजना है।

इस मिशन में छात्राएं सैटेलाइट सिस्टम, स्पेस टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े अन्य तकनीकी विषयों की ट्रेनिंग ले रही हैं। जेसी की यह उपलब्धि उनके परिवार और स्कूल के साथ-साथ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है।

कारपेंटर हैं जेसी के पिता

कंडुला जेसी आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के धवलेश्वरम की रहने वाली हैं। उनका परिवार साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता कारपेंटर हैं।

परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं होने के कारण जेसी के माता-पिता ने उन्हें निजी स्कूल से निकालकर सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाया। वर्तमान में जेसी जिला परिषद गर्ल्स हाईस्कूल, धवलेश्वरम में कक्षा 10वीं की पढ़ाई कर रही हैं।

शिक्षिका ने पहचानी प्रतिभा

जेसी की विज्ञान में रुचि और प्रतिभा को सबसे पहले उनकी शिक्षिका ने पहचाना। शिक्षिका ने उन्हें आगे बढ़ने का मौका देते हुए मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम के लिए पंजीकृत कराया।

जेसी का सपना भविष्य में इसरो में काम करना है। खास बात यह है कि अपनी सफलता तक सीमित रहने के बजाय उन्होंने स्कूल की अन्य छात्राओं को भी इस अवसर के लिए आवेदन करने के लिए प्रेरित किया।

शुरुआत में तकनीकी समस्या के कारण जेसी ऑनलाइन कोर्स पूरा नहीं कर पाई थीं। हालांकि, उनकी शिक्षिका के प्रयासों से उन्हें दोबारा मौका मिला। इसके बाद उन्होंने चयन प्रक्रिया के सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे किए।

बोर्ड परीक्षा के साथ की स्पेस साइंस की तैयारी

कक्षा 10वीं की पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा की तैयारी के साथ जेसी ने मिशन शक्तिसैट की ऑनलाइन कक्षाओं में भी नियमित रूप से हिस्सा लिया। पढ़ाई के दबाव के बावजूद उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े नए विषयों को समझने के लिए अतिरिक्त समय दिया।

कई तकनीकी अवधारणाएं उनके लिए चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। शिक्षकों की मदद और अध्ययन सामग्री के जरिए उन्होंने धीरे-धीरे इन विषयों पर अपनी पकड़ मजबूत की।

इस तरह जेसी ने बोर्ड परीक्षा की तैयारी और मिशन की ट्रेनिंग को एक साथ संभालते हुए कार्यक्रम के सभी चरण पूरे किए।

अंग्रेजी इंटरव्यू बनी बड़ी चुनौती

मिशन शक्तिसैट के चयन की प्रक्रिया में जेसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंग्रेजी भाषा में होने वाला इंटरव्यू था। इसके लिए उन्होंने अपने शिक्षकों की मदद ली और ऑनलाइन शैक्षणिक वीडियो के जरिए अंग्रेजी बोलने का लगातार अभ्यास किया।

कई हफ्तों की तैयारी के बाद जेसी ने इंटरव्यू में शानदार प्रदर्शन किया। उनकी मेहनत का नतीजा रहा कि उन्हें मिशन के लिए चुनी गई 20 भारतीय छात्राओं में जगह मिली।

युवाओं के लिए जेसी की सफलता में छिपा बड़ा संदेश

कंडुला जेसी की कहानी बताती है कि सफलता के लिए महंगे संसाधनों से ज्यादा मेहनत, जिज्ञासा, सही मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास जरूरी हैं।

उनकी कहानी से युवाओं को सीख मिलती है कि नए अवसरों को पहचानकर उनके लिए प्रयास करना चाहिए। कठिन विषयों और चुनौतियों से घबराने के बजाय लगातार सीखते रहना चाहिए। साथ ही, अपनी सफलता को केवल खुद तक सीमित रखने के बजाय दूसरों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

सरकारी स्कूल से अंतरिक्ष मिशन तक पहुंचने वाली जेसी आज उन हजारों विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की किरण हैं, जो बड़े सपने तो देखते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण उन्हें पूरा करने को लेकर असमंजस में रहते हैं।