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चांदी के नकली गहनों पर लगेगी लगाम! BIS ने बनाया बड़ा प्लान, बढ़ेगी टेस्टिंग और हॉलमार्किंग

August 9,2026 Fact Recorder

Business Desk: सोने की कीमतों में लगातार तेजी के बीच चांदी की ज्वेलरी लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। बढ़ती मांग के साथ नकली या कम शुद्धता वाले गहनों का जोखिम भी बढ़ा है। ऐसे में भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS चांदी के गहनों की जांच और हॉलमार्किंग व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी में है।

BIS अगले दो वर्षों में देशभर में चांदी के गहनों की टेस्टिंग करने वाली लैब का नेटवर्क बढ़ाने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को अधिक भरोसेमंद और शुद्ध चांदी की ज्वेलरी उपलब्ध कराना है।

चांदी की हॉलमार्किंग में तेजी

चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग भारत में साल 2005 से स्वैच्छिक है। हालांकि, सितंबर 2025 से हॉलमार्क वाले चांदी के गहनों पर HUID यानी हॉलमार्क विशिष्ट पहचान नंबर भी दिया जाने लगा है। इस नंबर की मदद से ग्राहक गहने की शुद्धता से जुड़ी जानकारी की जांच कर सकते हैं।

BIS के डिप्टी डायरेक्टर जनरल निशात एस हक के मुताबिक, चांदी की ज्वेलरी में HUID की शुरुआत के बाद हॉलमार्किंग की मांग में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसी बढ़ती जरूरत को देखते हुए BIS ने टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।

एक साल में करीब दोगुनी हुई हॉलमार्किंग

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 59 लाख चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग हुई। इससे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा करीब 32 लाख था।

यानी सिर्फ एक साल में चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग में बड़ा इजाफा हुआ है। फिलहाल देशभर में करीब 230 सेंटर BIS से मान्यता प्राप्त हैं, जहां चांदी के गहनों की जांच की जाती है। बढ़ती मांग को देखते हुए इन सेंटरों की संख्या बढ़ाने की तैयारी है।

सोने की ज्वेलरी पर भी BIS की कड़ी नजर

BIS सिर्फ हॉलमार्क जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार में बिक रहे हॉलमार्क वाले सोने के गहनों की भी निगरानी करता है। इसके लिए बाजार से सैंपल लिए जाते हैं और BIS की अपनी लैब में उनकी जांच की जाती है।

अगर कोई हॉलमार्क वाला उत्पाद तय मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इससे ज्वेलरी की शुद्धता को लेकर ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने में मदद मिलती है।

BIS के पास 440 से ज्यादा मान्यता प्राप्त लैब

BIS ने पिछले एक साल में करीब 2.70 लाख प्रोडक्ट सैंपल की जांच की है। देशभर में BIS की अपनी 10 लैब हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में सरकारी और निजी मान्यता प्राप्त लैब भी BIS के साथ जुड़ी हुई हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, 2014 में BIS के साथ करीब 147 मान्यता प्राप्त लैब थीं। अब इनकी संख्या बढ़कर लगभग 440 हो चुकी है। इसके अलावा करीब 350 सरकारी लैब भी BIS के पैनल में शामिल हैं।

AI और रोबोटिक्स से होगी टेस्टिंग आसान

BIS अब टेस्टिंग प्रक्रिया को ज्यादा तेज और सटीक बनाने के लिए नई तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहा है। इसके लिए AI, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों को टेस्टिंग प्रक्रिया में शामिल करने पर काम हो रहा है।

सीमेंट की जांच में रोबोटिक आर्म का ट्रायल किया जा रहा है। वहीं, लैब के टेस्टिंग उपकरणों को लैब इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (LIMS) से जोड़ा जा रहा है। इससे टेस्टिंग से जुड़े आंकड़े अपने आप रिकॉर्ड और कैलकुलेट किए जा सकेंगे, जिससे मानवीय गलतियों की संभावना कम होगी।

गहनों को लेकर शिकायत हो तो क्या करें?

अगर किसी ग्राहक को BIS प्रमाणित प्रोडक्ट की गुणवत्ता या शुद्धता को लेकर शिकायत है, तो वह BIS Care ऐप के जरिए शिकायत दर्ज करा सकता है। जरूरत पड़ने पर BIS संबंधित उत्पाद की जांच भी कर सकता है।

ऐसे में चांदी की ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहकों के लिए हॉलमार्क और HUID नंबर की जांच करना अहम हो जाता है। BIS का प्रयास है कि बढ़ती चांदी की मांग के बीच ग्राहकों को शुद्धता और गुणवत्ता को लेकर ज्यादा भरोसेमंद व्यवस्था मिल सके।