6 August 2026 Fact Recorder
Business Desk: भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के ऑफर फॉर सेल (OFS) को निवेशकों का शानदार समर्थन मिला। सरकार ने इस इश्यू में ग्रीन शू ऑप्शन का इस्तेमाल करते हुए 82 करोड़ से अधिक शेयर आवंटित किए और करीब 31,552 करोड़ रुपये जुटाए। हालांकि, OFS पूरा होने के बाद LIC के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। आइए समझते हैं इसकी वजह।
क्या होता है OFS?
ऑफर फॉर सेल (OFS) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें किसी सूचीबद्ध कंपनी के मौजूदा शेयरधारक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं। LIC के मामले में कंपनी ने कोई नया शेयर जारी नहीं किया, बल्कि केंद्र सरकार ने अपनी मौजूदा हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचा है। इस बिक्री से मिलने वाली पूरी राशि सरकार को मिलेगी, LIC को नहीं।
सरकार ने हिस्सेदारी क्यों बेची?
OFS से पहले LIC में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 96.5 फीसदी थी, जबकि आम निवेशकों के पास केवल 3.5 फीसदी शेयर थे। सेबी के नियमों के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम 10 फीसदी सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग होना जरूरी है। इसी नियम का पालन करने और विनिवेश के जरिए राजस्व जुटाने के लिए सरकार ने अपनी हिस्सेदारी बेची।
OFS के बाद शेयर क्यों गिरे?
सरकार ने OFS के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया, जो घोषणा से पहले के बंद भाव 428.50 रुपये से करीब 10.9 फीसदी कम था।
कम कीमत पर शेयर उपलब्ध होने की वजह से निवेशकों ने खुले बाजार से महंगे दाम पर शेयर खरीदने के बजाय OFS के जरिए खरीदारी को प्राथमिकता दी। इससे बाजार में शेयरों की मांग कम हुई और कीमतों पर दबाव बढ़ गया।
इसके अलावा, OFS के बाद बाजार में उपलब्ध शेयरों की संख्या भी काफी बढ़ गई। किसी भी शेयर की सप्लाई बढ़ने पर उसकी कीमत पर अल्पकालिक दबाव आना सामान्य माना जाता है।
कैसा रहा LIC का प्रदर्शन?
शेयरों में गिरावट के बावजूद LIC का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के नए कारोबार का मूल्य 41.6 फीसदी बढ़कर 14,179 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, कंपनी का शुद्ध लाभ 19.3 फीसदी बढ़कर 57,419 करोड़ रुपये हो गया। नए कारोबार का मार्जिन भी बेहतर हुआ है, जिससे कंपनी की लाभप्रदता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।













